जमशेदपुर: विश्व चॉकलेट दिवस के अवसर पर चॉकलेट की लोकप्रियता एक बार फिर चर्चा में है। बच्चों से लेकर बड़ों तक हर उम्र के लोग चॉकलेट पसंद करते हैं, लेकिन स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ध्यान रखना जरूरी है। डायटीशियन अन्नू सिन्हा के अनुसार, डार्क, मिल्क और व्हाइट चॉकलेट के पोषण तत्व, कोको की मात्रा, चीनी और वसा का स्तर अलग-अलग होता है। ऐसे में चॉकलेट का चुनाव केवल स्वाद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
डार्क चॉकलेट को बताया सबसे बेहतर विकल्प
डायटीशियन के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में कोको सॉलिड्स की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसमें फ्लेवोनॉइड्स और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने, रक्त संचार में सुधार करने और शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मददगार माने जाते हैं। उनका कहना है कि 70 प्रतिशत या उससे अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट का सीमित मात्रा में सेवन अन्य चॉकलेट की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है।
मिल्क और व्हाइट चॉकलेट में ज्यादा चीनी और फैट
डायटीशियन ने बताया कि मिल्क चॉकलेट में कोको की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि इसमें दूध, चीनी और वसा अधिक होती है। इसी वजह से यह अधिक मीठी और कैलोरी से भरपूर होती है। वहीं, व्हाइट चॉकलेट में कोको सॉलिड्स नहीं होते और यह मुख्य रूप से कोको बटर, दूध और चीनी से तैयार की जाती है।
ज्यादा सेवन से बढ़ सकते हैं स्वास्थ्य संबंधी जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, मिल्क और व्हाइट चॉकलेट में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बेहद कम होती है। इनका अधिक सेवन वजन बढ़ने, दांतों में कैविटी और ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित करने का कारण बन सकता है। इसलिए चॉकलेट खरीदते समय उसके पैकेट पर कोको प्रतिशत, चीनी और वसा की मात्रा जरूर जांचनी चाहिए।
सीमित मात्रा में ही करें सेवन
डायटीशियन अन्नू सिन्हा का कहना है कि बच्चों और वयस्कों, दोनों के लिए चॉकलेट का सेवन सीमित मात्रा में ही उचित है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और नियंत्रित मात्रा में चॉकलेट का सेवन बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक हो सकता है।