योगिनी एकादशी 2026 की सही तारीख हुई साफ, जानिए गृहस्थ और वैष्णव श्रद्धालु किस दिन रखें व्रत, क्या है पारण का शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत का पालन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के अनेक कष्टों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। वर्ष 2026 में एकादशी तिथि की विशेष स्थिति के कारण व्रत की सही तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
कब से कब तक रहेगी एकादशी तिथि?
पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर प्रारंभ होगी और 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि यह तिथि दोनों दिनों के सूर्योदय पर उपलब्ध नहीं रहेगी, इसलिए शास्त्रीय नियमों के अनुसार गृहस्थ और वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्रत की तिथि अलग-अलग निर्धारित की गई है।
गृहस्थ और वैष्णव श्रद्धालु किस दिन रखें व्रत?
धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना के अनुसार गृहस्थ श्रद्धालु 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई 2026, शनिवार को यह व्रत करेंगे। शास्त्रीय परंपरा के अनुसार जब एकादशी तिथि दोनों दिनों के सूर्योदय पर उपलब्ध नहीं होती, तब गृहस्थों के लिए पहला दिन और वैष्णवों के लिए दूसरा दिन व्रत के लिए मान्य माना जाता है।
जानिए पारण का शुभ समय
जो श्रद्धालु 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत करेंगे, वे 11 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शाम 4 बजकर 36 मिनट के बीच पारण कर सकते हैं। वहीं 11 जुलाई को व्रत रखने वाले वैष्णव श्रद्धालुओं के लिए पारण का शुभ समय 12 जुलाई को सुबह 5 बजकर 32 मिनट से सुबह 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि निर्धारित समय में पारण करने से ही व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।
व्रत में किन नियमों का करें पालन?
योगिनी एकादशी व्रत में दशमी तिथि से ही सात्विक जीवनचर्या अपनाने की परंपरा है। व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। इस दौरान लहसुन, प्याज, बैंगन, मसूर और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थों का सेवन वर्जित माना जाता है। व्रत के दिन फलाहार या व्रत में अनुमत आहार ग्रहण किया जाता है। साथ ही भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा, मंत्र-जप और भक्ति का विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी के दिन संयम, सत्य, सेवा और भगवान विष्णु के स्मरण से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। इस एकादशी को पापों के क्षय, मानसिक शांति और शुभ फल प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है। इसी कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस व्रत का पालन कर भगवान विष्णु से सुख, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।