रायपुर: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित वैश्विक तेल संकट को लेकर देश में सियासत तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल-डीजल की बचत और विदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल में कटौती की अपील के बाद कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह संकट चुनाव खत्म होने के बाद अचानक पैदा हुआ है?
भूपेश बघेल ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात लंबे समय से बने हुए हैं और इसके संकेत पहले से मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति “पीएम मोदी द्वारा प्रायोजित समस्या” है। बघेल ने कहा कि भारत ने अपने पारंपरिक मित्र देशों ईरान और रूस से दूरी क्यों बनाई और इज़राइल के साथ करीबी बढ़ाकर देश को क्या हासिल हुआ?
‘सरकार पहले खतरे से इनकार करती रही’
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि राहुल गांधी ने चुनाव से पहले ही आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उस समय सरकार और उसके मंत्री इन दावों को लगातार खारिज कर रहे थे। भूपेश बघेल ने कहा कि अब जब खुद सरकार संकट की बात स्वीकार कर रही है, तो उन मंत्रियों को जवाब देना चाहिए जिन्होंने पहले जनता को गुमराह किया।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देश की जनता को महंगाई और आय में कमी की “दोहरी मार” झेलनी पड़ सकती है। बघेल के मुताबिक, वैश्विक हालात का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।
पीएम मोदी ने की ईंधन बचाने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से सोने की खरीदारी से बचने और विदेशी मुद्रा खर्च कम करने की सलाह भी दी है।
इससे पहले हैदराबाद में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों से कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन क्लास और वर्चुअल मीटिंग जैसे विकल्पों को फिर अपनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देश के हर नागरिक को जिम्मेदार व्यवहार करना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब-जब देश किसी बड़े संकट या युद्ध जैसी स्थिति से गुजरा है, तब हर नागरिक ने जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने लोगों से ऊर्जा की बचत करने और ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल कम करने की अपील की, जिनके लिए विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से बढ़ी चिंता
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका फिर गहराने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज करते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं इजरायल की ओर से भी सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसी संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार लोगों से ऊर्जा बचत और खर्च नियंत्रित रखने की अपील कर रही है।