राम मंदिर दान चोरी में बड़ा खुलासा: ऑडिट रिपोर्ट की अनदेखी, सीसीटीवी फुटेज गायब; एसआईटी ने उठाए गंभीर सवाल
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पहले से मौजूद ऑडिट आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कई महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं मिले, जिससे चोरी की पुरानी घटनाओं की जांच प्रभावित हुई है।
ऑडिट रिपोर्ट में पहले ही दर्ज थीं गंभीर आपत्तियां
एसआईटी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक की ऑडिट रिपोर्ट में प्रबंधन व्यवस्था से जुड़ी कई कमियों का उल्लेख किया गया था। इनमें हुंडी खोलने की तारीख और संख्या में गड़बड़ी, चढ़ावे की राशि को गिनती के लिए स्थानांतरित करते समय पर्याप्त सीसीटीवी निगरानी का अभाव तथा दान में मिली वस्तुओं की रसीद जारी नहीं किए जाने जैसी अनियमितताएं शामिल थीं। रिपोर्ट में 180 दिनों तक सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की भी सिफारिश की गई थी, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया।
180 दिन की रिकॉर्डिंग नहीं मिली, फुटेज गायब होने पर सवाल
जांच के दौरान एसआईटी को 180 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि चोरी के साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से फुटेज हटाए गए हो सकते हैं। उपलब्ध रिकॉर्डिंग की जांच में लगभग 70 बार चोरी जैसी गतिविधियां सामने आने का दावा किया गया है।
27 अप्रैल से पहले भी चोरी होने की आशंका
एसआईटी का कहना है कि आरोपियों के बयान, बरामद नकदी, बहुमूल्य वस्तुएं और बैंक खातों में आय से अधिक जमा राशि इस ओर संकेत करती है कि चढ़ावे की चोरी 27 अप्रैल 2026 से पहले भी हो रही थी। हालांकि उस अवधि की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने के कारण पहले की घटनाओं का सटीक आकलन नहीं किया जा सका।
सुरक्षा व्यवस्था के पालन में मिलीं गंभीर खामियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन नहीं होने के कारण चोरी की घटनाएं संभव हो सकीं। प्रवेश और निकासी के समय तलाशी, निर्धारित वेशभूषा, निजी सामान पर नियंत्रण, हुंडीवार गिनती, मूल्यवर्ग के अनुसार अभिलेखीकरण और अधिकारियों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं व्यवहार में प्रभावी रूप से लागू नहीं थीं। जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित पर्यवेक्षकों और प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन नहीं कराया गया।
रेंडम तलाशी की व्यवस्था भी प्रभावी नहीं रही
एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक, 20 सितंबर 2024 को बनाई गई तलाशी व्यवस्था में 6 फरवरी 2025 को जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के जरिए बदलाव किया गया, जिसके बाद नियमित तलाशी के स्थान पर रेंडम जांच का प्रावधान रखा गया। जांच एजेंसी ने इस संशोधन के कारणों पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित व्यवस्था के तहत भी नियमित या रेंडम तलाशी प्रभावी तरीके से नहीं की गई।