‘दीदी और भैया हाशिए पर चले गए’, बंगाल-तमिलनाडु के रुझानों के बीच अखिलेश यादव पर केशव मौर्य का बड़ा हमला

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लखनऊ: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के रुझानों के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। चुनावी माहौल के बीच सोशल मीडिया पर सियासी वार-पलटवार का दौर फिर गरमा गया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए विपक्षी गठबंधन के कई बड़े नेताओं को भी निशाने पर लिया है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन की पार्टियां शुरुआती रुझानों में पिछड़ती दिखाई दे रही हैं। इसी को लेकर केशव मौर्य ने विपक्षी गठबंधन पर जोरदार तंज कसा।

‘अखिलेश को अब जनता सुनने को तैयार नहीं’

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अब उत्तर प्रदेश की जनता सुनने को तैयार नहीं है।

उन्होंने ममता बनर्जी और एमके स्टालिन पर निशाना साधते हुए लिखा कि जिन ‘दीदी’ और ‘भैया’ के सहारे अखिलेश यादव अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे थे, जनता ने उन्हें अब हाशिए पर पहुंचा दिया है।

केशव मौर्य ने अपने बयान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति देश पहले ही देख चुका है। इसके साथ ही बिहार की राजनीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने तेजस्वी यादव को भी निशाने पर लिया और कहा कि वह भी हालिया चुनावी मुकाबले में बुरी तरह हार चुके हैं।

2027 को लेकर भी साधा निशाना

डिप्टी सीएम ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें 2027 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के सपने देखना छोड़ देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों के सामने विपक्ष की राजनीति कमजोर पड़ चुकी है।

केशव मौर्य ने तंज भरे अंदाज में ‘सपा बहादुर’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अब समाजवादी पार्टी के हिस्से में केवल लंबा इंतजार ही बचा है। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा भारतीय जनता पार्टी के साथ है और यही भरोसा आगे भी कायम रहेगा।

PDA रणनीति के बीच बढ़ी सियासी गर्मी

केशव मौर्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी लगातार ‘PDA’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति आगे बढ़ा रही है। सपा खुद को 2027 विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत दावेदार के तौर पर पेश करने में जुटी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अब विपक्षी गठबंधन की कमजोरियों और अलग-अलग राज्यों में उसके प्रदर्शन को उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक केशव मौर्य के बयान के जरिए भाजपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अखिलेश यादव के राष्ट्रीय सहयोगी दल अब उन्हें राजनीतिक मजबूती देने की स्थिति में नहीं हैं।

 

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