एंग्जाइटी डिसऑर्डर को हल्के में ना लें ,क्या है इसके लक्षण और उसका उपचार?

एंग्जाइटी (Anxiety) की बीमारी में रोगी को अचानक घबराहट, बेचैनी महसूस होने लगती है. आज के समय में ये बीमारी खतरनाक रूप लेती जा रही है

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एंग्जाइटी ये एक ऐसा शब्द है, जिसको आजकल हम लोगों को मुंह से खूब सुनते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये छोटा सा शब्द कितनी बड़ी बीमारी होती है.अक्सर लोग एंग्जाइटी को हल्के में लेते हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं करना चाहिए, ये एक बड़ी बीमारी होती है. आजकल के युवाओं में ये बीमारी तेजी से फैलती जा रही है. कई रिचर्स में ये बात सामने आई है, जो लोग खुलकर अपनी बात किसी से नहीं कह पाते या फिर किसी हादसे को दिल में बैठा लेते हैं, वो ही एंग्जाइटी के शिकार ज्यादा होते हैं.आज हम आपको एंग्जाइटी के लक्षण और उपचार के बारे में बताएंगे-

एंग्जाइटी क्या होता है ?

एंग्जाइटी एक मानसिक परेशानी है, जिसमें रोगी तेज बैचेनी के साथ नकारात्मक विचार, चिंता और डर में खुद को गिरफ्त पाता है. जैसे की अचानक हाथ कांपना, पसीना आना, घबराहट होना, मन में उल्झन होना,बिना बात के रोना, आदि. बता दें कि लगातार नींद नहीं आने से भी एंग्जाइटी की दिक्कत हो जाती है. अगर व्यक्ति अधिक समय तक इसमें उलझा रहे तो हार्ट तक का पैशेंट हो सकता है.

एंग्जाइटी के मुख्य लक्षण क्या हैं ?

टेंशन को अधिक लेना एंग्जाइटी के पैशेंट के लिए बहुत ही घातक होता है. मन में किसी बात या हादसे का बैठ जाना. किसी से अपने मन की बातें शेयर ना कर पाना एंग्जाइटी का रूप लेता है. अगर ये दिक्कत शुरू में ही पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है.

-दिल की धड़कन का बढ़ जाना या सांस फूल जाना -मांसपेशियों में तनाव का बढ़ जाना -छाती में खिंचाव या भी घरबाहट महसूस होना

एंग्जाइटी का इलाज

अगर आपके किसी भी जानने वाले को एंग्जाइटी की बीमारी हो तो इसको हल्के में ना लें. वैसे एंग्जाइटी का इलाज दवा, काउंसलिंग, योग, खुश रहना, खुद को बिजी रखना, अपनी बातें शेयर करना होता है.

साइकोथेरेपी का इस्तेमाल करें

रोगी इस बीमारी में साइकोथेरेपी की मदद ले सकते है. बता दें कि साइकोथैरेपी बहुत लाभदायक होती है. इस थैरेपी में मन पर नियंत्रण करना सिखाया जाता है, इसके साथ ही हमेशा ही खुद को जितना हो सके बिजी रखें.

रोगी को टेंशन से बाहर निकालें

अगर कोई व्यक्ति एंग्जाइटी की परेशानी से जूझ रहा हो तो उसको टेंशन से बाहर निकालना चाहिए. ऐसे मरीजों को किसी बात की परेशानी नहीं होने देनी चाहिए, उनके परेशान होने पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए. उससे ज्यादा से ज्यादा बातें करना चाहिए. सिगरेट आदि से इन मरीजों को दूर रहना चाहिए.

खाने पर ध्यान देना

ऐसे रोगियों को खाने पर खास ध्यान देना चाहिए. हरी सब्जियों और हेल्दी फूड को खाना चाहिए. जंक फूड या तले हुए भोजन से परहेज़ करना चाहिए, साथ ही समय पर भोजन करना चाहिए. एंग्जाइटी के मरीजों को खाना कभी स्किप नहीं करना चाहिए.

खुश रहना और वर्कआउट करना

एंग्जाइटी के मरीजों को हमेशा खुश रहना चाहिए. किसी भी तरह का स्ट्रैस मरीजों के लिए हानिकारक होता है. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा सबसे बातें करनी चाहिए और जो काम पसंद हो करना चाहिए. इसके अलावा हर रोज वर्कआउट और योग जरूर करना चाहिए. अगर मरीज वर्कआउट और योग करते हैं तो बीमारी से निजात पा सकते हैं.

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