नई दिल्ली: सोने की कीमतों में पिछले सप्ताह दर्ज हुई मजबूत तेजी का असर इस हफ्ते भी देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अटकलों और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने को आगे भी समर्थन मिल सकता है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है।
पिछले सप्ताह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे सर्राफा बाजार में नई हलचल पैदा हो गई है।
चार सप्ताह की गिरावट के बाद लौटी तेजी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में लगातार चार सप्ताह की कमजोरी के बाद जोरदार वापसी देखने को मिली। सप्ताह के दौरान सोना 3,216 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत मजबूत होकर करीब 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से बाजार को सहारा मिला है।
चांदी में भी जबरदस्त उछाल
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज बढ़त दर्ज की गई। एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 13,938 रुपये यानी 6.2 प्रतिशत चढ़कर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, औद्योगिक मांग और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने चांदी को अतिरिक्त मजबूती दी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहा सहारा
वैश्विक बाजार में भी सोने की चमक बरकरार रही। पिछले सप्ताह कॉमेक्स पर सोने का वायदा भाव 91 डॉलर यानी 2.2 प्रतिशत बढ़कर 4,187.30 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं चांदी 5.3 प्रतिशत उछलकर 62.81 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने सोने की कीमतों को मजबूती प्रदान की है।
फेडरल रिजर्व के संकेतों पर टिकी नजर
इस सप्ताह बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहेगी। निवेशक अमेरिकी सेवा क्षेत्र पीएमआई, व्यापार आंकड़ों और बेरोजगारी दावों से जुड़े आंकड़ों पर नजर रखेंगे।
इसके अलावा यूरो क्षेत्र, चीन, जापान और जर्मनी से आने वाले महंगाई के आंकड़े भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। इन आंकड़ों से यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि प्रमुख केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपना सकते हैं।
रूस-यूक्रेन तनाव भी बढ़ा रहा मांग
विशेषज्ञों के मुताबिक रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव ने भी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की मांग को समर्थन दिया है। अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में निवेशक पारंपरिक रूप से सोने की ओर रुख करते हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में कुल 41 टन सोना जोड़ा, जिससे दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी हुई है।
इस सप्ताह कैसी रह सकती है चाल?
विश्लेषकों का मानना है कि सोना फिलहाल अपने हालिया निचले स्तरों से उबर चुका है और उसे मजबूत समर्थन मिल रहा है। हालांकि अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड प्रतिफल और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों में किसी भी बदलाव का सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो इस सप्ताह भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती का रुख जारी रह सकता है।