RBI से सरकार को मिल सकता है रिकॉर्ड डिविडेंड, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2.69 लाख करोड़ से भी ज्यादा ट्रांसफर की उम्मीद

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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड मिलने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यह राशि पिछले रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है। यह बढ़ी हुई राशि सरकार के लिए वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, खासकर पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न वित्तीय दबाव को संभालने में महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकती है।

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में RBI ने केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड ट्रांसफर किया था, जो वित्त वर्ष 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 27 प्रतिशत अधिक था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है।

इस महीने RBI बोर्ड मीटिंग में होगा बड़ा फैसला

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक इस महीने होने वाली अपनी केंद्रीय बोर्ड बैठक में डिविडेंड ट्रांसफर की अंतिम राशि पर फैसला कर सकता है। यह निर्णय RBI के संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे (Economic Capital Framework – ECF) के आधार पर लिया जाएगा।

इस ढांचे के तहत आकस्मिक जोखिम बफर (Contingent Risk Buffer – CRB) को RBI की बैलेंस शीट के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का प्रावधान है, जिसके आधार पर सरप्लस की गणना की जाती है।

2026-27 में और बढ़ सकता है सरकार का रेवेन्यू

बजट दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में RBI, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से डिविडेंड और सरप्लस के रूप में लगभग 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। यह मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में करीब 3.75 प्रतिशत अधिक है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इस बार अनुमान अपेक्षाकृत कम रखा था, जबकि वास्तविक डिविडेंड इससे अधिक हो सकता है। इसका एक बड़ा कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का मजबूत प्रदर्शन है।

वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों का कुल ऑपरेटिंग मुनाफा 3.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि शुद्ध मुनाफा 11.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.98 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर दर्ज किया गया।

नॉन-टैक्स रेवेन्यू में अहम भूमिका निभाता है डिविडेंड

सरकारी बजट में RBI और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से मिलने वाला डिविडेंड नॉन-टैक्स रेवेन्यू का अहम हिस्सा होता है। इस श्रेणी में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य निवेशों से मिलने वाली आय भी शामिल होती है।

अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार को नॉन-टैक्स रेवेन्यू के रूप में करीब 6.66 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। वहीं कुल टैक्स राजस्व 28.66 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 7.18 प्रतिशत अधिक है।

सरकारी खजाने को मिल सकता है मजबूत सहारा

RBI से संभावित रिकॉर्ड डिविडेंड को सरकार के लिए एक मजबूत वित्तीय बफर के रूप में देखा जा रहा है। इससे राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने और विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।

 

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