HAPPY WOMEN’S DAY : महिला दिवस पर जाने महिलाओ के ऐसे अधिकार जो उनकी रोजमर्रा जिंदगी में जरुरी है ।

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HAPPY WOMEN’S DAY 2022 :  एक नारी का भारत में पैदा होने के साथ ही ,उनके साथ भेदभाव और अत्याचार शुरु हो जाते है और उनको अपने हक के लिए अंत तक लड़ना पड़ता है ।
लेकिन हर महिलाओ को अपने खिलाफ होने वाले अपराध से लड़ने के लिए नियम कानून का पता होना जरुरी है । जिससे वह समय आने पर अपने अधिकार माँग सके ।

1-अगर पति आपका विश्वास तोड़ता है तो ?

अगर आपके पति आपका विश्वास तोड़ते है तो 1995 के सेक्सन 13 के तहत वह पति से तलाक ले सकते है । अगर किसी महिला का उसके पति से तलाक का केस चल रहा है तो वह हिंदू विवाह अधिनियम के सेक्शन 24 के तहत वह अपने गुजर-बसर के लिए गुजारा भत्ते की मांग कर सकती है।

आपके मौलिक अधिकार –

राइट टू एजूकेशन में हिस्सेदारी तय है। शिक्षा के अधिकार में जिन बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया जाता है, उनमें 50% बालिकाओं का होना अनिवार्य है। राइट टू एजूकेशन 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है।

2-18 से पहले विवाह निषेध –

यह कानूनी अपराध है। ऐसे मामलों में 2 साल की जेल हो सकती है। अगर अभिभावक अपनी नाबालिग बेटी की शादी उसकी इच्छा के खिलाफ कर देते हैं तो यह विवाह मान्य नहीं होगा। नाबालिग लड़की को बालिग होने पर दोबारा विवाह करने का अधिकार है।

3-पिता कि जगह मां का नाम

पिता कि जगह माँ अपने बच्चे के एडमिशन में अपना नाम लिखवा सकती है ।

4- बच्चे के जन्म पर महिला को जबरन लिंग जाँच व कन्या भ्रुण हत्या

अगर आप महिलाओ को लिंग जाँच के लिए force करते है । कन्या भ्रूण हत्या निषेध अधिनियम 1994 में प्रसव से पहले लिंग की जांच या इसके लिए महिला को बाध्य करना अपराध है। बाध्य करने वाले को 5 साल जेल व 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

5- सभी के लिए आर्थिक हिस्सेदारी का अधिकार

सभी हिंदू महिलाओं को अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी और पूर्ण नियंत्रण का अधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 देता है। बेटियों को विवाह के बाद भी बेटों के बराबर संपत्ति का हक है। विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने फैसलों से व्यवस्था दी है कि सरकारी पद पर कार्यरत पिता की मृत्यु के बाद बेटी चाहे व विवाहित हो या अविवाहित,

6- प्रेंग्नेसी में अवकाश का अधिकार

प्रसूति लाभ अधिनियम 2017 के तहत कामकाजी महिलाओं को प्रसव के बाद तीन महीने का वैतनिक अवकाश का हक है। अविवाहित महिला बच्चा भी गोद ले सकती है। हिंदू एडॉप्शन एंड सेक्शन एक्ट के तहत अविवाहित महिला को भी बच्चा गोद लेने का अधिकार है।

7- लिव -इन में रह रही महिला को अधिकार

वह लिव- इन में रह रही महिला वह हिंसा के खिलाफ शिकायत कर सकती है , गुजारा भत्ता माँग सकती है । अपनी सतांन का हक भी हासिल कर सकती है ।

8- तलाक के बाद भी हक

तलाक के बाद अगर आप पर कोई और स्थान नही है तो आप ससुराल में रह सकती है

9- मुस्लिम महिलाओ को हक

निकाह के बाद भी मुस्लिम महिलाए भी गुजारा भत्ता मांग करती है , जब तक दुबारा निकाह नही हो जाता , वह अपने ससुर से गुजारा भत्ता भी मांग सकती है ।

10 – संतान आपको छोड़ नही सकती

बुजुर्ग महिलाओं का पति की संपत्ति में तो हक है ही संतान भी उनकी अनदेखी नहीं कर सकतीं। माता-पिता की देखरेख के लिए मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेटेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 लागू है। साधन विहीन माता-पिता अपनी संतान से सहयोग पाने के हकदार हैं।

HAPPY WOMEN’S DAY 2022

रिर्पोट – शिवी अग्रवाल

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