India-US ट्रेड डील से पहले भारत का बड़ा संदेश: प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल खरीद जारी रहेगी, ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी और अमेरिका द्वारा रूस-ईरान से तेल खरीद पर दी गई अस्थायी छूट खत्म किए जाने के बावजूद भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि वह रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। सरकार के सूत्रों के मुताबिक यह फैसला पूरी तरह ‘राष्ट्रीय हित’ और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि, कूटनीतिक प्रयास तेज
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत पहले भी ऐसे मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेता रहा है और इस बार भी वही रुख बरकरार है। अमेरिका को इस फैसले के लिए राजी करने की कोशिशें भी जारी हैं। इसी कड़ी में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में अमेरिका के राजदूत सर्गियो गोर से मुलाकात की, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति और साझेदारी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति पर उच्चस्तरीय मंथन
बैठक में अमेरिकी तेल और एलपीजी आयात बढ़ाने के साथ-साथ रूस से तेल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इससे पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान भी ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा हो चुकी है।
पश्चिम एशिया संकट में रूस ही भरोसेमंद विकल्प
अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा हालात में भारत की भारी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस के अलावा कोई मजबूत विकल्प नहीं है। ईरान पर हमले से पहले तक भारत अपनी करीब 60 फीसदी तेल जरूरत होर्मुज जलमार्ग के जरिए पूरी करता था, जो अब बाधित हो चुका है।
मध्य-पूर्व से सप्लाई बाधित, रूस बना मुख्य सहारा
इराक और कुवैत से तेल आपूर्ति लगभग ठप हो चुकी है, जबकि यूएई और सऊदी अरब से सप्लाई सीमित हो गई है। इन हालात में रूस से बड़े पैमाने पर आयात के चलते भारत के पास फिलहाल करीब 60 दिनों का तेल भंडार सुरक्षित है।
रूसी तेल आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
निजी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 में भारत ने रूस से 2.06 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो फरवरी के 1.06 मिलियन बैरल प्रतिदिन से लगभग दोगुना है। सरकारी तेल कंपनियों—आईओसी, ओएनजीसी और एचपीसीएल—ने भी खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 46 फीसदी तक पहुंच चुकी है, जो अब तक का उच्चतम स्तर है।
अब रूस तय कर रहा कीमत, छूट खत्म
विशेषज्ञों का कहना है कि अब रूस-भारत ऊर्जा व्यापार की शर्तें बदल चुकी हैं। यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में मिलने वाली 15-20 डॉलर प्रति बैरल की छूट अब खत्म हो चुकी है और भारतीय कंपनियां बाजार दर पर ही तेल खरीद रही हैं। प्राथमिकता सिर्फ आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
अमेरिका की छूट खत्म, दबाव बढ़ा
अमेरिका ने पहले रूस से तेल खरीद पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बाद 15 अप्रैल 2026 तक अस्थायी राहत दी गई थी। अब इस छूट को खत्म करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट कर दिया है कि आगे कोई नवीनीकरण नहीं होगा।
भारत की प्राथमिकता—जनता की ऊर्जा जरूरतें
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत के 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए जरूरी हर कदम उठाया जाएगा।
नई ऊर्जा साझेदारी के संकेत
सूत्रों के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच नई ऊर्जा साझेदारी पर भी काम चल रहा है। इसके तहत भारत अमेरिका से क्रूड, एलपीजी और एलएनजी आयात बढ़ा सकता है। यह कदम संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ऊर्जा कूटनीति की अग्निपरीक्षा
विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत की ऊर्जा कूटनीति की बड़ी परीक्षा है। यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत ने वैश्विक दबावों के बावजूद रूस से तेल खरीद जारी रखी थी और अब भी वही रणनीति अपनाई जा रही है।