गौतमबुद्धनगर में ब्याज माफी योजना-2026 लागू, 5 करोड़ तक के बकाये पर मिलेगी बड़ी राहत; अर्थदंड भी होगा माफ
गौतमबुद्धनगर: उत्तर प्रदेश सरकार ने विभिन्न कर अधिनियमों के तहत बकायेदारों को राहत देने के लिए ब्याज माफी योजना-2026 लागू की है। इसके तहत 31 दिसंबर 2025 तक बने कर बकायों पर निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज में 50 से 100 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। इसके अलावा केवल बकाया राशि जमा नहीं करने के कारण लगाया गया अर्थदंड पूरी तरह माफ किया जाएगा। योजना की जानकारी सहायक आयुक्त, राज्य कर, प्रभार-मनोरंजन कर, गौतमबुद्धनगर ने दी है।
बकाये की राशि के हिसाब से मिलेगी ब्याज में छूट
योजना के तहत बकायेदारों को मूल बकाया धनराशि के अनुसार ब्याज का निर्धारित हिस्सा जमा करना होगा। अलग-अलग श्रेणियों में छूट का प्रावधान इस प्रकार है:
- 10 लाख रुपये तक का मूल बकाया: ब्याज की 100 प्रतिशत माफी मिलेगी। कोई ब्याज जमा नहीं करना होगा।
- 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का मूल बकाया: ब्याज का 10 प्रतिशत जमा करना होगा और शेष 90 प्रतिशत माफ होगा।
- 1 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक का मूल बकाया: ब्याज का 25 प्रतिशत जमा करना होगा और 75 प्रतिशत माफ होगा।
- 5 करोड़ रुपये से अधिक का मूल बकाया: ब्याज का 50 प्रतिशत जमा करना होगा और बाकी 50 प्रतिशत माफ किया जाएगा।
इन सभी श्रेणियों में केवल बकाया राशि जमा नहीं करने के कारण लगाया गया अर्थदंड 100 प्रतिशत माफ होगा। हालांकि, अन्य प्रकार के अर्थदंड इस योजना के दायरे में शामिल नहीं हैं।
किन कर अधिनियमों के बकायों पर मिलेगा लाभ?
ब्याज माफी योजना का लाभ उत्तर प्रदेश बिक्री कर अधिनियम, 1948, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956, उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम, 1979 और उससे संबंधित मनोरंजन कर नियमावली के तहत बने बकायों पर मिलेगा।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिनियम, 1995, उत्तर प्रदेश केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमावली, 1997, उत्तर प्रदेश प्रवेश कर अधिनियम, 2007 और उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2008 के तहत 31 दिसंबर 2025 तक सृजित बकाये भी इसके दायरे में आएंगे।
तीन महीने तक प्रभावी रहेगी योजना
यह योजना शासनादेश जारी होने की तारीख से तीन महीने तक लागू रहेगी। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।
योजना का लाभ विभिन्न आदेशों के तहत तय की गई मांग और समाधान योजनाओं के अंतर्गत बची हुई समाधान राशि पर भी मिलेगा। स्वीकृत या आरोपित कर से जुड़े बकाये के साथ-साथ अदालतों में तय हो चुके और लंबित विवादों से संबंधित ब्याज एवं अर्थदंड पर भी इसके प्रावधान लागू होंगे।
हर आदेश के तहत बनाई गई बकाया मांग के लिए योजना का लाभ अलग-अलग मिलेगा।
पहले बकाया जमा कर चुके लोगों को भी मिलेगा फायदा
ऐसे बकायेदार भी योजना का लाभ ले सकेंगे, जिन्होंने इसके लागू होने से पहले मूल बकाया राशि पूरी या आंशिक रूप से जमा कर दी है।
अदालतों में लंबित मामलों के लिए संबंधित बकायेदारों को वाद में नोट प्रेस आवेदन (Not Press Application) प्रस्तुत करना होगा। साथ ही, मामला वापस लेने के संबंध में शपथ-पत्र देना भी जरूरी होगा। इसके बाद ही योजना का लाभ मिल सकेगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बकायेदार ने देय कर, मूल बकाया, ब्याज या अर्थदंड से अधिक रकम जमा कर दी है, तो अतिरिक्त राशि न तो वापस की जाएगी और न ही उसका समायोजन होगा। यह नियम योजना लागू होने से पहले और बाद में जमा की गई अतिरिक्त रकम पर लागू होगा।
ऑनलाइन आवेदन के बाद 15 दिनों में होगा सत्यापन
योजना का लाभ लेने के लिए बकायेदारों को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन से पहले मूल बकाया, ब्याज और अर्थदंड की गणना करके निर्धारित राशि ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य है।
आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी अधिकतम 15 दिनों के भीतर बकाया राशि, ब्याज और अर्थदंड की गणना का सत्यापन करेंगे। यदि सभी विवरण सही पाए जाते हैं, तो आवेदन की तारीख से अधिकतम 15 दिनों के भीतर आरसी बकाया न होने का प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।
यदि जांच के दौरान आवेदन में कोई गलती मिलती है, तो अधिकारी 15 दिनों के भीतर पोर्टल पर ही नोटिस जारी कर बकायेदार को इसकी जानकारी देंगे। इसके बाद बकायेदार निर्धारित समय में गलतियों को सुधारकर जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे।