रंगपंचमी क्यों मनाते हैं, जानिए कारण

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नई दिल्ली : 25 मार्च को देशभर में धुलेंडी का त्योहार उत्साह के साथ मनाया गया। रंगों के त्योहार होली की धूम देशभर में देखने को मिली। हालांकि कुछ स्थानों पर होली के 5 दिन बाद आने वाला रंगपंचमी का त्योहार ज्यादा उत्साह के साथ मनाया जाता है। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में तो रंगपंचमी पर विशेष तौर पर गेर का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल रंग पंचमी 30 मार्च 2024 को मनाई जाएगी। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 29 मार्च 2024 को रात 08.20 बजे शुरू होगी और पंचमी तिथि की समाप्ति 30 मार्च 2024 को रात 09.13 बजे होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार रंगपंचमी 30 मार्च को ही मनाना उचित होगा। इस दिन देवताओं के साथ होली खेलने का शुभ मुहूर्त सुबह 07.46 बजे से सुबह 09.19 बजे के बीच होगा।

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, रंग पंचमी मुख्य रूप से पंच तत्व पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल एवं आकाश को सक्रिय करने के लिए मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता है कि रंगपंचमी पर यदि पवित्र मन से देवी-देवताओं की आराधना की जाती है तो वे आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आते हैं। इस दिन देवताओं के साथ अबीर-गुलाल लगाकर होली खेलना चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में मौजूद ग्रह दोष खत्म हो जाता है। देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है। घर में धन की कमी नहीं होती है। व्यक्ति के तमोगुण और रजोगुण का नाश होता है। सतोगुण के विकास से जीवन में शांति रहती है।

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