Maha Shivratri : जानिए शिवरात्रि के दिन शिवरात्रि के बारे में कुछ बातें

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Maha Shivratri:- 

वो भूत भी है , वो नाथ भी है !
वो शिवम भी है , वो नीलकंठ भी है !!
क्या -क्या नाम दुं उसको !
उसमें तो समाई पुरी दुनिया है !!
जटाओ में अपनी गंगा समा के !
सर पर अपने चद्रं बैठा के !!
नंदी पे होकर सवार ,भोले चले लेकर अपनी बारात !
पी कर भांग जमा लो रंग !!
जिंदगी बीते खुशियों के संग !
सज सबर कर दुल्हन बन !!
माँ गोरा चली , शिव के संग !
लेकर नाम महाकाल का !!
दिल में भर लो , शिवरात्रि की उंमग !

आप सभी को सबसेसबसेपहले महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं Shivratri क्यों मनाई जाती है यह बात अधिकतर लोग जानते हैं लेकिन पुरे तरीके से नहीं जानते हैं

Shivratri तो हर महीने में आती है लेकिन महाशिवरात्रि साल भर में 1 बार आती है. फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है. इस बार साल 2022 में यह पर्व 1 मार्च यानी मंगलवार को है. महाशिवरात्रि का महत्व इसलिए है क्योंकि यह शिव और शक्ति की मिलन की रात है, आध्यात्मिक रूप से इसे प्रकृति और पुरुष के मिलन की रात के रूप में बताया जाता है, शिव भक्त इस दिन व्रत रखकर अपने आराध्य का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं मंदिरों में जलाभिषेक का कार्यक्रम दिन भर चलता है. लेकिन क्या आपको पता है कि Maha Shivratri क्यों मनाई जाती है इसके पीछे की घटना क्या है, चलिए जानते है

पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिव जी पहली बार प्रकट हुए थे. जब का प्राकट्य ज्योतिर्लिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में था ऐसा शिवलिंग जिसका ना तो आधी था और ना कोई अंत. एक कथा यह भी है कि महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग विभिन्न चौसट जगहों पर प्रकट हुए थे. उनमें से हमें केवल 12 जगह का नाम पता है। इन्हें हम 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से जानते हैं। महाशिवरात्रि के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में लोग दीपस्तंभ लगाते हैं दीपस्तंभ इसलिए लगाते हैं ताकि लोग शिव जी के अग्नि वाले अनंत लिंग का अनुभव कर सके यह जो मूर्ति है उसका नाम लिंगोभव हैं यानी जो लिंक से प्रकट हुए थे। ऐसा लिंग किसकी ना तो आदि था और ना ही अंत।

Maha Shivratri को पूरी रात शिव भक्त अपने आराध्य जागरण करते हैं शिव भक्त इस दिन शिव जी की शादी का उत्सव मनाते हैं मान्यता है कि मां शिवरात्रि को शिव जी के साथ शक्ति की शादी हुई थी इस दिन शिव जी ने वैराग्य जीवन छोड़कर ग्रस्त जीवन में प्रवेश किया था फिर दोबारा गीत है बे ग्रस्त बन गए माना जाता है कि शिवरात्रि के 15 दिन पश्चात होली का त्यौहार मनाने के पीछे एक कारण यह भी है.शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि पूजा में 6 चीजो को जरूर शामिल करना चाहिए जैसे-
1- शिव लिंग पर पानी ,दूध और शहद का अभिषेक ,बेल या बेर के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते है
2- सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिवलिंग को लगाया जाता है यह पुण्य का प्रतिनिधित्व करता है
3- फल जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को दर्शाते हैं
4- जलती धूप, धन ,अनाज
5- दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है
6- और पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन करते हैं

अभिषेक में कुछ चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जैसे-
तुलसी के पत्ते ,हल्दी, चंपा और केतकी के फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए

आशा करती हूं कि आप सभी को महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है उसका महत्व का पता चल गया होगा
इसी के साथ आप सभी को एक बार फिर Maha Shivratri की हार्दिक शुभकामनाएं .

रिर्पोट – संपदा अग्रवाल

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