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इंग्लैंड के इतिहास में पहली बार कम हुई ईसाइयों की संख्या, बढ़ें हिंदू-मुस्लिम

लंदन: इंग्लैंड के इतिहास में पहली बार ईसाइयों की आबादी देश की कुल आबादी के आधे से भी कम हो गई है. इंग्लैंड और वेल्स में ताजा जनगणना आंकड़ों के मुताबिक, ईसाइयों की संख्या में 13 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है. जबकि मुस्लिमों और हिंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. वहीं कोई भी धर्म न मानने वालों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है.

ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) के 2021 की जनगणना में पहली बार इंग्लैंड और वेल्स में आधे से भी कम लोगों ने खुद को ईसाई बताया है. 2011 में पिछली जनगणना में 59.3 प्रतिशत लोगों ने खुद को ईसाई बताया था जो अब 46.2 प्रतिशत (2.75 करोड़) रह गए हैं. यानी ईसाइयों की आबादी में 13.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

2011 में मुस्लिम जनसंख्या 4.9 प्रतिशत (27 लाख) थी जो अब बढ़कर 6.5 प्रतिशत (39 लाख) हो गई है. हिंदू आबादी में भी वृद्धि देखी गई है. 2011 में हिंदुओं की आबादी 1.5 प्रतिशत (8.18 लाख) थी जो अब बढ़कर 1.7 प्रतिशत (10 लाख) हो गई है. वहीं कोई भी धर्म न मानने वाले यानी नास्तिकों की आबादी में 37.2 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जो एक चौथाई से अधिक है.

हर 10 साल में की जाने वाली जनगणना ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स द्वारा होती है. इसकी रिपोर्ट के अनुसार, सिख समाज की संख्या भी बढ़ी है. 2011 में करीब 4 लाख 23 हजार सिख मौजूद थे. यानी कुल आबादी का 0.8 प्रतिशत, जो अब 0.9 प्रतिशत ( करीब 5 लाख 24 हजार) हो गया है. इंग्लैंड और वेल्स में बौद्धों की जनसंख्या भी बढ़ी है. 2011 में यह 0.4 प्रतिशत (249,000) थी जो पिछले साल 0.5 प्रतिशत (273,000) हो गई. वहीं यहूदी समाज की जनसंख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ. यह अब भी 0.5 प्रतिशत पर बरकरार है.

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