बिना लाइसेंस खोल सकेंगे पब्लिक चार्जिंग स्टेशन, सरकार ने जारी किए नए नियम

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इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electric Vehicles) को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन (Electric Charging Station) स्थापित करने के नियमों में बदलाव किया है. अब कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना लाइसेंस पब्लिक चार्जिंग स्टेशन खोल सकता है. हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होगा. पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (PCS) खोलने के लिए जरूरी मानकों को चिन्हित किया गया है. इनमें नागरिक, बिजली और सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों के लिए उपयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर के मानदंड शामिल हैं

पूरी करनी होगी ये शर्तें- ऐसे स्टेशन ऊर्जा मंत्रालय, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा समय-समय पर निर्धारित मार्गनिर्देशों के तहत निष्पादन संबंधी मानदंडों और प्रोटोकोल के साथ-साथ टेक्निकल, सुरक्षा संबंधी मानदंडों/मानकों/विनिर्देशों को पूरा करना होगा.

नहीं लगेंगे ये चार्जेज

ओपन एक्सेस के माध्यम से किसी भी उत्पादक कंपनी से बिजली प्राप्त कर सकती है. इस उद्देश्य के लिए सभी प्रकार से पूर्ण आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर खुली पहुंच प्रदान की जाएगी. उन्हें क्रॉस सब्सिडी के वर्तमान स्तर (टैरिफ नीति दिशानिर्देशों के अनुसार 20 फीसदी से अधिक नहीं) के लिए लागू अधिभार के बराबर, ट्रांसमिशन शुल्क और व्हीलिंग शुल्क का भुगतान करना होगा. इसमें कोई अन्य अधिभार या शुल्क नहीं लगाया जाएगा.

राज्य सरकार सर्विस चार्ज की सीमा तय करेंगी

बिजली रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है और इसे ध्यान में रखते हुए कि कई मामलों में पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए केंद्र/राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है, राज्य सरकार ऐसे चार्जिंग स्टेशनों द्वारा लिए जाने वाले सर्विस चार्ज की उच्चतम सीमा तय करेगी.

विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) के अनुसार समय-सीमा निर्धारित की गई है. इसके अनुसार मेट्रो शहरों में 7 दिनों के भीतर, अन्य नगरपालिका क्षेत्रों में 15 दिनों के भीतर और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 दिनों के भीतर पीसीएस को कनेक्शन प्रदान किया जाएगा. इन समय-सीमा के भीतर वितरण लाइसेंसधारी नया कनेक्शन प्रदान करेंगे या मौजूदा कनेक्शन में सुधार करेंगे.

सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों को बिजली की आपूर्ति के लिए टैरिफ एक सिंगल पार्ट टैरिफ होगा और 31 मार्च, 2025 तक आपूर्ति की औसत लागत से अधिक नहीं होगा. वही टैरिफ बैटरी चार्जिंग स्टेशन (बीसीएस) के लिए लागू होगा. घरेलू खपत के लिए लागू टैरिफ ही घरेलू चार्जिंग के लिए लागू होगा.

सरकार उपलब्ध कराएगी जमीन

सरकार ने राज्य के स्वामित्व वाली संस्थाओं को पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वाली निजी एजेंसियों को 1 रुपये प्रति यूनिट की न्यूनतम कीमत के साथ बोली लगाने के लिए जमीन की पेशकश करने की अनुमति दी है. पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए सरकारी एजेंसियों के पास उपलब्ध भूमि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को 1 रुपये प्रति यूनिट की रियायती दर पर दी जा सकती है.

इसके लिए भू-स्वामित्व वाली एजेंसी को ऐसे पीसीएस व्यवसाय से त्रैमासिक आधार पर भुगतान करना होगा. दिशानिर्देशों के तहत एक मॉडल रेवेन्यू शेयरिंग एग्रीमेंट को भी शामिल किया गया है.

कहां खोल सकेंगे पब्लिक चार्जिंग स्टेशन

ईवी मालिकों की रेंज संबंधी चिंता को दूर करने के उद्देश्य से, 3 किमी X 3 किमी के ग्रिड में कम से कम एक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराने के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, राजमार्गों/सड़कों के दोनों ओर प्रत्येक 25 किमी पर एक चार्जिंग स्टेशन खोले जाएंगे.

लंबी दूरी के ईवी और/या बसों/ट्रकों आदि जैसे भारी ईवी के लिए, हर 100 किलोमीटर पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कम से कम एक फास्ट चार्जिंग स्टेशन होना चाहिए, जो कि प्रमुखता से पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों के भीतर/बाहर स्थित राजमार्गों/सड़क के प्रत्येक किनारे पर हो.

गो इलेक्ट्रिक अभियान (Go Electric Campaign)

ई-मोबिलिटी ट्रांजिशन के लिए भारत सरकार के प्रयास के हिस्से के रूप में, बिजली मंत्रालय ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और नीति आयोग के साथ मिलकर ई-मोबिलिटी के लाभों पर आम जनता, संभावित ईवी मालिकों को EV अपनाने के लिए सरकारी प्रोत्साहनों के बारे में सूचित करने, जिज्ञासा पैदा करने और इसे मांग में बदलने, इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में गलत सूचना को हतोत्साहित करने और एक प्लेटफॉर्म के तहत कई हितधारकों को एक साथ लाने के उद्देश्य से एक राष्ट्रव्यापी “गो इलेक्ट्रिक” अभियान शुरू किया है.

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