नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों की पड़ताल में अब यह पता चला है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र राजस्थान तक कैसे पहुंचा और इसके बदले छात्रों से कितनी रकम वसूली गई। मामले में कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि NEET-UG का लीक प्रश्नपत्र यश यादव के जरिए राजस्थान पहुंचा था। बताया जा रहा है कि यश यादव की पहचान विकास बिवाल नाम के व्यक्ति से थी और इसी संपर्क के माध्यम से पेपर आगे छात्रों तक पहुंचाया गया।
हार्डकॉपी स्कैन कर बनाई गई थी पीडीएफ
जांच एजेंसियों को पता चला है कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने प्रश्नपत्र की हार्डकॉपी को स्कैन कर उसकी पीडीएफ फाइल तैयार की थी। आरोप है कि इसके बाद यह फाइल राजस्थान के सीकर स्थित कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई कर रहे कई छात्रों तक पहुंचाई गई।
बताया जा रहा है कि प्रश्नपत्र को डिजिटल फॉर्म में तैयार करने के बाद उसे चुनिंदा छात्रों तक गोपनीय तरीके से भेजा गया, ताकि परीक्षा से पहले उन्हें सवालों की जानकारी मिल सके।
पेपर के बदले छात्रों से वसूले गए लाखों रुपये
जांच में शामिल सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कुछ छात्रों ने बताया कि उनसे पेपर उपलब्ध कराने के बदले 2 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की रकम ली गई थी। एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह पैसा किन लोगों तक पहुंचा और पूरे नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका रही।
हालांकि, मामले में सामने आए शुभम नाम के आरोपी ने खुद को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड मानने से इनकार किया है। इसके बावजूद जांच एजेंसियां उससे लगातार पूछताछ कर रही हैं।
खुद परीक्षा पास नहीं कर पाया यश यादव
जांच में यह भी सामने आया है कि पेपर लीक से जुड़ा बताया जा रहा यश यादव खुद परीक्षा पास नहीं कर सका। जानकारी के मुताबिक, वह बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज यानी बीएएमएस का छात्र है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्तर से लीक हुआ और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
मनी ट्रेल की जांच में जुटी एजेंसियां
मामले की जांच कर रही सीबीआई ने कई कोचिंग संस्थानों के स्टाफ और संचालकों से भी पूछताछ की है। इसके अलावा छात्रों और गिरफ्तार आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस मनी ट्रेल पर है।
जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि छात्रों से ली गई रकम किन माध्यमों से ट्रांसफर हुई और किन बैंक खातों तक पहुंची। एजेंसियां डिजिटल ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।