तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस गहराया, दूसरी बार भी राज्यपाल से खाली हाथ लौटे विजय; 118 विधायकों के समर्थन पर अड़ा राजभवन
तमिलनाडु की राजनीति इस समय जबरदस्त राजनीतिक हलचल और जोड़-तोड़ के दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके सत्ता के बेहद करीब पहुंचकर भी बहुमत के आंकड़े से दूर दिखाई दे रही है। इसी राजनीतिक अनिश्चितता के बीच टीवीके प्रमुख थलपति विजय एक बार फिर सरकार बनाने का दावा पेश करने राजभवन पहुंचे, लेकिन राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें दोबारा स्पष्ट बहुमत के समर्थन पत्र लाने को कहा है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने साफ कर दिया है कि सरकार गठन से पहले टीवीके को 118 विधायकों के समर्थन के हस्ताक्षर प्रस्तुत करने होंगे। इसके बिना शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। बताया जा रहा है कि राजभवन किसी भी संभावित राजनीतिक अस्थिरता से बचना चाहता है और स्थायी बहुमत के भरोसे के बाद ही सरकार गठन की अनुमति देने के पक्ष में है।
पहले भी लौट चुके हैं विजय
यह पहली बार नहीं है जब विजय सरकार बनाने का दावा लेकर राज्यपाल से मिले हों। इससे पहले भी वे राजभवन पहुंचे थे, लेकिन पर्याप्त संख्या बल न होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा था। अब दूसरी मुलाकात में भी राज्यपाल ने वही रुख अपनाते हुए बहुमत के दस्तावेजी प्रमाण की मांग दोहराई है।
विजय ने मुलाकात के बाद कहा कि अभी तक उन्हें राजभवन की ओर से “ग्रीन सिग्नल” नहीं मिला है। ऐसे में तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
वीसीके के रुख पर टिकी सबकी नजर
राजनीतिक गलियारों में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा वीसीके के अगले कदम को लेकर हो रही है। सूत्रों के अनुसार, वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से उनके आवास पर मुलाकात की है। माना जा रहा है कि वीसीके जल्द ही टीवीके के साथ गठबंधन को लेकर अपना अंतिम फैसला घोषित कर सकती है।
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि डीएमके नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि यदि वीसीके टीवीके के साथ जाने का फैसला करती है तो पार्टी उसकी राह में बाधा नहीं बनेगी। ऐसे में वीसीके का निर्णय तमिलनाडु की सत्ता का समीकरण बदल सकता है।
एआईएडीएमके भी सक्रिय, ईपीएस ने मांगा समय
दूसरी ओर एआईएडीएमके खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। पार्टी नेता पलानीसामी (ईपीएस) ने भी राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पुडुचेरी में ठहरे एआईएडीएमके विधायकों के बीच लगातार रणनीतिक बैठकों का दौर जारी है। बताया जा रहा है कि कुछ विधायक टीवीके के साथ जाने की स्थिति में उपमुख्यमंत्री पद और कैबिनेट में हिस्सेदारी चाहते थे, लेकिन ईपीएस इस फॉर्मूले के पक्ष में नहीं थे। इसके बाद कुछ विधायक डीएमके के साथ संभावनाएं तलाशने में भी जुट गए हैं।
सीपीआई ने उठाए राज्यपाल की भूमिका पर सवाल
तमिलनाडु इकाई की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने राज्यपाल के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने कहा कि संविधान और संवैधानिक परंपराओं के मुताबिक सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने और फिर विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए।
सीपीआई ने सुप्रीम कोर्ट के एसआर बोम्मई फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बहुमत परीक्षण सदन के पटल पर होना चाहिए, न कि राजभवन में। पार्टी ने राज्यपाल से संविधान की भावना के अनुरूप निर्णय लेने की अपील की है।
केरल यात्रा की अटकलों पर भी विराम
इस बीच राज्यपाल की संभावित केरल यात्रा को लेकर भी चर्चाएं तेज थीं, लेकिन लोक भवन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि राज्यपाल फिलहाल चेन्नई में ही मौजूद हैं और अभी उनकी केरल यात्रा की कोई योजना नहीं है।
तीन सवालों पर टिकी तमिलनाडु की राजनीति
तमिलनाडु में अब पूरा राजनीतिक घटनाक्रम तीन बड़े सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है — क्या विजय 118 विधायकों का समर्थन जुटा पाएंगे? क्या वीसीके टीवीके के साथ जाएगी? और क्या राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को फ्लोर टेस्ट का मौका देंगे या पहले बहुमत के दस्तावेजी प्रमाण पर ही कायम रहेंगे?
आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति की दिशा और सत्ता का भविष्य तय करने वाले साबित हो सकते हैं।