भारत की ओर बढ़े गैस से भरे ‘शिवालिक’ और ‘नंदादेवी’, मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पर होगी एंट्री; तेल-गैस आपूर्ति को राहत की उम्मीद
नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और तेल-गैस आपूर्ति संकट के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाले दो गैस जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदादेवी’ बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर भारत पहुंच रहे हैं। इन दोनों जहाजों में कुल करीब 92,712 टन एलपीजी लदी हुई है, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार ‘शिवालिक’ जहाज सोमवार को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचेगा, जबकि दूसरा जहाज ‘नंदादेवी’ मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचेगा। दोनों जहाज उन 24 पोतों में शामिल थे जो युद्ध की स्थिति बनने के बाद से स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकला ‘जग लाडक़ी’ जहाज
ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी एक और अहम जानकारी सामने आई है। 14 मार्च 2026 से फुजैराह में फंसा ‘जग लाडक़ी’ नामक तेल जहाज भी अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकल चुका है। यह जहाज उस समय फुजैराह में कच्चा तेल लोड कर रहा था, जब तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था।
खतरे की स्थिति के बावजूद यह जहाज लगभग 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रवाना हो गया। जानकारी के मुताबिक यह जहाज शनिवार सुबह करीब 10.30 बजे अपनी यात्रा पर निकल गया।
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर
ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़ों के अनुसार भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा देश लगभग 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और करीब 60 प्रतिशत एलपीजी भी विदेशों से मंगाता है।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पहले भारत के कुल तेल आयात का लगभग आधा हिस्सा और एलपीजी आयात का करीब 85 से 90 प्रतिशत भाग सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आता रहा है।
भंडार जारी होने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें ऊंची
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा तेल भंडार जारी किए जाने के बावजूद ब्रेंट क्रूड की कीमत 102.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 97.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि बाद में इनमें तेजी से गिरावट देखने को मिली, लेकिन कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।