तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि के बाद संभावित फसल नुकसान को लेकर गौतमबुद्धनगर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। रबी मौसम 2025-26 की फसलों में क्षति की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सर्वे की प्रक्रिया शुरू करा दी है, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।
फसल क्षति के आकलन के लिए गांव स्तर पर सर्वे टीमें गठित
जिलाधिकारी ने राजस्व ग्राम स्तर पर सर्वे टीमों का गठन किया है, जिनमें लेखपाल, कृषि विभाग के अधिकारी और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि शामिल हैं। इन टीमों का उद्देश्य फसलों में हुए नुकसान का सटीक आंकलन करना और पात्र किसानों को फसल बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति दिलाना है।
किसानों के लिए हेल्पलाइन और संपर्क व्यवस्था जारी
प्रशासन ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सहायता तंत्र भी सक्रिय किया है। फसल क्षति से जुड़ी किसी भी जानकारी या मार्गदर्शन के लिए किसान एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के टोल फ्री नंबर 14447 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जिला और तहसील स्तर पर नामित अधिकारियों के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

इनायतपुर गांव में गेहूं की क्रॉप कटिंग का किया निरीक्षण
जिलाधिकारी ने तहसील सदर के ग्राम पंचायत इनायतपुर पहुंचकर गेहूं फसल की क्रॉप कटिंग का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर निर्धारित मानकों के अनुसार फसल उत्पादन का परीक्षण कराया और पूरी प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया।
निर्धारित मानकों पर हुआ उत्पादन परीक्षण
निरीक्षण के दौरान किसान युगल कौशल के खेत, गाटा संख्या 285 पर 10×10×10 मीटर क्षेत्र में गेहूं की कटाई कराई गई, जिसमें 22.230 किलोग्राम उपज प्राप्त हुई। इसके बाद किसान राजेंद्र के खेत, गाटा संख्या 404 पर भी समान मानकों के तहत क्रॉप कटिंग की गई, जहां 22.900 किलोग्राम उत्पादन दर्ज किया गया।
किसानों से संवाद, समस्याओं के समाधान के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने किसानों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्रॉप कटिंग प्रयोग फसल उत्पादन के सही आकलन का आधार है, जिससे किसानों को बीमा और अन्य योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।

कृषि निर्यात नीति के तहत क्लस्टर निर्माण पर समीक्षा बैठक
निरीक्षण के बाद कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कृषि निर्यात नीति-2019 के तहत क्लस्टर निर्माण को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि एक बासमती धान क्लस्टर पहले ही गठित किया जा चुका है, जबकि एक अन्य फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के लिए निर्यात उन्मुख क्लस्टर गठन का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया।
निर्यात और अनुदान योजनाओं की दी गई जानकारी
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 50 हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर उत्पादन का 30 प्रतिशत निर्यात करने पर 10 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान है। इसके अलावा कृषि उत्पादों के निर्यात पर परिवहन अनुदान के रूप में 25 प्रतिशत तक सहायता या अधिकतम 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते हैं।
प्रशिक्षण और शिक्षा संस्थानों को भी मिलेगा लाभ
कृषि निर्यात और पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित करने वाले सरकारी संस्थानों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 25 या उससे अधिक छात्रों के पंजीकरण पर 50 लाख रुपये तक का एकमुश्त अनुदान देने की व्यवस्था है।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश, क्लस्टर निर्माण में तेजी लाने पर जोर
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि बासमती धान क्लस्टर निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि जिले के किसानों को कृषि निर्यात नीति का अधिकतम लाभ मिल सके। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक और निर्यातक उपस्थित रहे।