सुपर एल नीनो का खतरा गहराया: सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी की चेतावनी, भारत के मानसून पर संकट के संकेत

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नई दिल्ली। वैश्विक जलवायु में बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्री सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति सामान्य एल नीनो से आगे बढ़कर एक शक्तिशाली “सुपर एल नीनो” का रूप ले सकती है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

क्या है सुपर एल नीनो और क्यों बढ़ी चिंता
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। जब यह वृद्धि औसत से करीब 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो जाती है, तब इसे “सुपर एल नीनो” कहा जाता है। ऐसे घटनाक्रम आमतौर पर 10 से 15 वर्षों में एक बार होते हैं, लेकिन इनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। वर्तमान परिस्थितियां 1997-98 और 2015-16 जैसे शक्तिशाली एल नीनो की ओर इशारा कर रही हैं।

दुनियाभर में दिख सकते हैं अलग-अलग असर
सुपर एल नीनो का प्रभाव हर क्षेत्र में अलग-अलग रूप में सामने आता है। दक्षिण-पूर्व एशिया समेत कई हिस्सों में सूखा और भीषण गर्मी का खतरा बढ़ सकता है, जबकि दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तटों पर भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा समुद्री तूफानों की प्रकृति और आवृत्ति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर जनजीवन और अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

भारत के मानसून पर मंडरा रहा खतरा
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। आमतौर पर मजबूत एल नीनो के दौरान मानसून कमजोर या असमान हो जाता है, खासकर उत्तर और मध्य भारत में। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। बारिश में अनिश्चितता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है और खाद्य सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है।

हीटवेव और तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की आशंका
सुपर एल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में तेज वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर 2027 तक महसूस किया जा सकता है। इस दौरान कई देशों में रिकॉर्ड स्तर की गर्मी और तीव्र हीटवेव देखने को मिल सकती हैं। गर्म हवा अधिक नमी को अपने अंदर समाहित करती है, जिससे कम समय में अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं।

आने वाले समय को लेकर अनिश्चितता, तैयारी जरूरी
हालांकि संकेत स्पष्ट हैं, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि एल नीनो कितना शक्तिशाली होगा। आने वाले महीनों में इसकी स्थिति और प्रभाव का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित जलवायु परिवर्तन को देखते हुए अभी से तैयारी करना जरूरी है, ताकि इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सके और जनजीवन को सुरक्षित रखा जा सके।

 

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