शरद पवार अस्पताल में भर्ती: बारामती उपचुनाव में नहीं कर पाएंगे मतदान, जनता के नाम भावुक अपील

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोमवार दोपहर बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट किया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वे बारामती विधानसभा उपचुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।

डॉक्टरों ने यात्रा से किया मना, नहीं डाल पाएंगे वोट

सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार को नियमित जांच और उपचार के तहत अस्पताल में रखा गया है। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है और मुंबई से बाहर यात्रा करने पर रोक लगाई है। ऐसे में 23 अप्रैल को होने वाले बारामती उपचुनाव में उनका मतदान करना संभव नहीं हो पाया है।

इस बीच शरद पवार ने सोशल मीडिया के जरिए बारामती की जनता के नाम एक भावुक संदेश साझा किया है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूरी और दुख जाहिर किया।

‘1967 से हर चुनाव में किया मतदान, इस बार मजबूरी’

अपने संदेश में शरद पवार ने लिखा कि 1967 में पहला चुनाव लड़ने के बाद से उन्होंने हमेशा बारामती विधानसभा क्षेत्र में अपने मताधिकार का उपयोग किया है। उन्होंने बताया कि इस बार भी उन्होंने मतदान करने का निर्णय लिया था, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें यात्रा से मना किया है, जिसके चलते वे इस बार मतदान नहीं कर पाएंगे। उन्होंने इसे अपने लिए बेहद दुखद और खेदजनक स्थिति बताया और उम्मीद जताई कि बारामती की जनता उनकी मजबूरी को समझेगी।

सुनेत्रा पवार के समर्थन में की अपील

शरद पवार ने अपने संदेश में मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने इस उपचुनाव में सुनेत्रा अजित पवार को समर्थन दिया है। उन्होंने इसे स्वर्गीय अजित पवार को श्रद्धांजलि बताया और मतदाताओं से आग्रह किया कि वे सुनेत्रा पवार को वोट देकर उन्हें सम्मान दें। उन्होंने भरोसा जताया कि बारामती की जनता, जिसने हमेशा उन पर विश्वास किया है, इस बार भी उनकी अपील का सकारात्मक जवाब देगी।

वैकल्पिक मतदान विकल्प भी नहीं मिला

शरद पवार ने यह भी बताया कि उन्होंने मतदान के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं के बारे में चुनाव अधिकारियों से जानकारी ली थी, लेकिन उन्हें बताया गया कि ऐसे कोई विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद भारी मन से उन्हें मतदान से दूर रहने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने अंत में एक बार फिर मतदाताओं से अपील की कि वे बड़ी संख्या में मतदान करें और सुनेत्रा अजित पवार को समर्थन दें।

 

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