मध्य प्रदेश में किसानों को बड़ी राहत, जमीन अधिग्रहण पर मिलेगा 4 गुना मुआवजा; विकास परियोजनाओं को भी मिलेगी रफ्तार

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मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐलान किया है कि अब राज्य में किसी भी किसान की जमीन अधिग्रहित करने पर उसे गाइडलाइन वैल्यू का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। इस फैसले को किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और तेज विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फैक्टर बढ़ने से दोगुना हुआ मुआवजा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भू-अर्जन मुआवजे का फैक्टर 1 से बढ़ाकर 2 कर दिया गया है। पहले किसानों को गाइडलाइन रेट का दोगुना भुगतान मिलता था, लेकिन अब यह बढ़कर चार गुना हो जाएगा। इस बदलाव से किसानों को उनकी जमीन का अधिक उचित मूल्य मिल सकेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

पुरानी व्यवस्था में मिल रहा था कम दाम
सरकार के अनुसार, वर्ष 2014 में तय की गई व्यवस्था के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान दर लागू थी, लेकिन गाइडलाइन वैल्यू कम होने के कारण किसानों को वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा नहीं मिल पा रहा था। वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही थीं। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए यह संशोधन किया गया।

कानूनी प्रावधान के तहत लिया गया फैसला
इस बदलाव को लागू करने के लिए ‘मध्य प्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013’ का सहारा लिया गया है। इस कानून की धारा 26 के तहत भूमि मूल्य निर्धारण के सिद्धांत तय किए जाते हैं, जिससे किसानों को उचित मुआवजा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

कैबिनेट समिति ने किया गहन अध्ययन
इस निर्णय से पहले सरकार ने मंत्रिमंडलीय समिति का गठन कर जमीनी हकीकत का अध्ययन कराया। लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में बनी इस समिति में उद्योग और जल संसाधन विभाग के मंत्री भी शामिल थे। 21 जनवरी को हुई बैठक में जनप्रतिनिधियों, उद्योग संगठनों और किसान प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद मुआवजा बढ़ाने की सिफारिश की गई।

अब मुआवजे की राशि में बड़ा इजाफा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में लोक निर्माण विभाग करीब 10 हजार करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दे चुका है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह राशि बढ़कर करीब 20 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी, जो सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगी। इसी तरह जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं में भी मुआवजा राशि दोगुनी होने का अनुमान है।

विकास और किसान हित के बीच संतुलन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले को केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि ‘किसान सम्मान’ का संकल्प बताया है। उनका कहना है कि सरकार की प्राथमिकता किसानों के हितों की रक्षा करना है, साथ ही विकास परियोजनाओं को भी गति देना है। यह निर्णय दोनों के बीच संतुलन स्थापित करेगा।

सरकार का दावा—विवाद होंगे कम, विकास होगा तेज
सरकार का मानना है कि भूमि अधिग्रहण में सबसे बड़ा विवाद मुआवजे को लेकर होता है। ऐसे में मुआवजा बढ़ाने से न केवल किसानों को संतोषजनक भुगतान मिलेगा, बल्कि परियोजनाएं भी बिना बाधा के तेजी से पूरी हो सकेंगी। साथ ही, राज्य में बुनियादी ढांचे और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

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