जनगणना में गलत जानकारी देना पड़ सकता है भारी, घर-गाड़ी या संपत्ति छिपाने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान
लखनऊ: जनगणना के दौरान गलत जानकारी देना या तथ्य छिपाना लोगों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर जानकारी छिपाता है या गलत तथ्य प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में तीन साल तक की सजा और एक हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
उत्तरदाता और प्रगणक दोनों पर लागू होंगे नियम
जनगणना अधिनियम के तहत दंड का प्रावधान केवल जानकारी देने वाले व्यक्ति पर ही नहीं बल्कि प्रगणक पर भी समान रूप से लागू होता है। यदि कोई प्रगणक जनगणना से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
जनगणना के पांचवें दिन भी स्वगणना की प्रक्रिया जारी रही। इसी दौरान कुछ लोगों द्वारा संपत्ति या अन्य जानकारियां छिपाने की चर्चाओं के बाद प्रगणक और पर्यवेक्षक अधिक सतर्क हो गए हैं।
भौतिक सत्यापन के बाद होगी फीडिंग
गोरखपुर के चार्ज अधिकारी और सदर एसडीएम दीपक गुप्ता ने बताया कि जनगणना कर्मी घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे और उसके बाद ही विवरण दर्ज किया जाएगा। यदि किसी बड़े मकान में कम कमरे बताए जाते हैं या कई वाहनों में से केवल एक वाहन की जानकारी दी जाती है, तो उसकी जांच अन्य माध्यमों से भी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और अन्य रिकॉर्ड के जरिए भी सत्यापन किया जाएगा। यदि किसी क्षेत्र में असामान्य रूप से कम आबादी या अनियमित आंकड़े मिलते हैं, तो वहां दोबारा जांच कराई जा सकती है।
संपत्ति की जानकारी का टैक्स से नहीं होगा संबंध
जिला जनगणना अधिकारी विनीत कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि जनगणना में दी जाने वाली चल-अचल संपत्ति की जानकारी का आयकर या सरकारी सुविधाओं से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी भी जानकारी को छिपाने की जरूरत नहीं है। हालांकि यदि विवाद की स्थिति में आरोप साबित होते हैं, तो जनगणना अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जनगणना फॉर्म के कुछ सवाल चर्चा में
जनगणना फॉर्म में शामिल कुछ सवाल इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। 34 सवालों वाले इस फॉर्म में परिवार की संरचना और वैवाहिक स्थिति से जुड़े कई विकल्प दिए गए हैं। परिवार में कितने दंपति हैं, इसका निर्धारण पत्नी की संख्या के आधार पर किया जाएगा।
इसके अलावा परिवार का मुखिया कौन होगा, यह उम्र या लिंग से तय नहीं होगा। परिवार के सदस्य जिस व्यक्ति को मुखिया मानेंगे, उसी का नाम फॉर्म में दर्ज किया जाएगा। अधिकारी के मुताबिक, परिवार की महिला सदस्य भी मुखिया हो सकती है और इसके लिए किसी उम्र सीमा का प्रावधान नहीं है।