ट्विशा मौत मामले में बड़ा एक्शन, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष पद से हटाई गईं, विभागीय जांच शुरू
भोपाल: भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपित रिटायर्ड जज और पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए उन्हें जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटा दिया। इसके साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई मध्य प्रदेश सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निर्देश पर की गई है। राज्य आयोग के रजिस्ट्रार को गिरिबाला सिंह के खिलाफ पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम उनके खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना प्रकरण के बाद उठाया गया है।
पूछताछ के लिए तीसरी बार भेजा गया समन
उधर, ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही पुलिस ने गिरिबाला सिंह को पूछताछ के लिए तीसरा समन जारी किया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि लगातार नोटिस दिए जाने के बावजूद अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में और सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने साफ कहा है कि यदि जांच में सहयोग नहीं किया गया तो पुलिस अदालत से उनकी अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग कर सकती है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी का पद या प्रभाव जांच प्रक्रिया में बाधा नहीं बन सकता।
12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था ट्विशा का शव
गौरतलब है कि 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में ट्विशा शर्मा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी के फंदे पर लटका मिला था। मामले के सामने आने के बाद दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोपों के आधार पर विशेष जांच दल का गठन किया गया था।
जांच के दौरान मामले ने तूल पकड़ा और पुलिस ने परिवार के सदस्यों से लगातार पूछताछ शुरू की। मामले को लेकर सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
समर्थ सिंह अब भी फरार, तलाश में जुटीं छह टीमें
मामले में गिरिबाला सिंह को 15 मई को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत मिल चुकी है। वहीं उनके बेटे और अधिवक्ता समर्थ सिंह को अब तक कोई राहत नहीं मिली है। उनकी अग्रिम जमानत याचिका 18 मई को अदालत ने खारिज कर दी थी।
फिलहाल समर्थ सिंह फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश के लिए पुलिस की छह टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया जा चुका है।
पहले समर्थ सिंह की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया। इस बीच उनकी ओर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए नई याचिका भी दायर की गई है, जिस पर सुनवाई का इंतजार है।