हिंडन-यमुना डूब क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों पर बड़ा अलर्ट, बाढ़ में नुकसान हुआ तो खुद जिम्मेदार होंगे निर्माणकर्ता
गौतमबुद्धनगर : मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए सिंचाई विभाग ने हिंडन और यमुना नदी के डूब क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि डूब क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माणों को बाढ़ से किसी प्रकार का नुकसान होने पर उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह निर्माणकर्ताओं की होगी। ऐसे मामलों में न तो शासन और न ही प्रशासन किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति या सुरक्षा उपलब्ध कराएगा।
अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड गाजियाबाद ने बताया कि गौतमबुद्धनगर में हिंडन नदी के तटवर्ती क्षेत्र और रिंग बंध के निकट स्थित कई गांव हिंडन नदी के डूब क्षेत्र की परिधि में आते हैं। इनमें छजारसी, चोटपुर, यूसुफपुर, चकशाहबेरी, बहलोलपुर, गढ़ी चौखंडी, हैबतपुर, परथला खंजरपुर, सौरखा जाहीदाबाद, ककराला, अलावर्दीपुर, जलपुरा, हल्दोनी और कुलेसरा सहित कई गांव शामिल हैं।
यमुना तट के कई गांव भी डूब क्षेत्र में शामिल
विभाग के अनुसार हिंडन-यमुना दोआब बंध के निकट स्थित इलाहावास, सूथियाना, शहदरा, लखनावली, बेगमपुर, मुबारकपुर, गुर्जरपुर, झटटा, बादौली बांगर, तुगलपुर, कोंडली बांगर, शफीपुर, चुहड़पुर और मोमनाथल समेत कई गांव भी डूब क्षेत्र की सीमा में आते हैं। इसके अलावा यमुना नदी के बाएं किनारे पर स्थित मोतीपुर, तिलवाड़ा, गढ़ी समस्तीपुर, बादौली खादर, कोंडली खादर, कामबक्शपुर, गुलावली, दोस्तपुर मंगरौली, छपरौली और असदुल्लापुर तथा हरियाणा की ओर दाएं किनारे पर स्थित औरंगाबाद, दलेलपुर और याकूतपुर की भूमि भी डूब क्षेत्र में शामिल है।
स्कूल, फार्म हाउस और प्लांट समेत कई अवैध निर्माण मौजूद
अधिशासी अभियंता ने बताया कि डूब क्षेत्र में स्थित भूमि पर भवन, स्कूल, फार्म हाउस, क्रेशर प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट, कंक्रीट रेडी मिक्स प्लांट और बदरपुर सैंड धुलाई की होदियों सहित कई निर्माण और निर्माणाधीन संरचनाएं मौजूद हैं, जिन्हें अवैध निर्माण की श्रेणी में माना गया है।
बाढ़ के दौरान बढ़ सकता है बड़ा खतरा
विभाग ने चेतावनी दी है कि बाढ़ के समय नदी की धारा में अवरोध उत्पन्न होने से इन अवैध निर्माणों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है, जिससे जन-धन का भारी नुकसान होने की आशंका है। चूंकि ये निर्माण अवैध हैं, इसलिए बाढ़ की स्थिति में सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन या शासन की ओर से सुरक्षा उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा।
नुकसान की भरपाई नहीं करेगा शासन
विभाग ने बताया कि शासनादेश दिनांक 16 मार्च 2010 तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा 20 मई 2013 को पारित आदेशों के तहत डूब क्षेत्र में इस प्रकार के निर्माण प्रतिबंधित हैं। आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे अवैध निर्माणों को बाढ़ से होने वाली क्षति की कोई प्रतिपूर्ति शासन द्वारा नहीं की जाएगी और न ही उनके लिए बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे।
अवैध निर्माण हटाने की अपील, कार्रवाई की चेतावनी
सिंचाई विभाग ने आमजन से अपील की है कि डूब क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माणों को तत्काल हटा लें या ध्वस्त कर दें तथा भविष्य में कोई नया निर्माण न करें। विभाग ने चेतावनी दी है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ की जाने वाली किसी भी कार्रवाई और किसी अप्रत्याशित जन-धन हानि के लिए निर्माणकर्ता स्वयं जिम्मेदार होंगे। ऐसे मामलों में सिंचाई विभाग और प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।