योगी सरकार का बड़ा फैसला, 100 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की जांच करेंगे IIT संस्थान, घटिया निर्माण पर कसेगी नकेल

0 23

लखनऊ: प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सड़क, सेतु, पेयजल पाइपलाइन और सीवर पाइपलाइन जैसी बड़ी परियोजनाओं में घटिया निर्माण रोकने के लिए अब थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट कराया जाएगा। योगी सरकार ने इसके लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी जारी कर दी है। 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की जांच देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों से कराई जाएगी।

अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार की ओर से जारी एसओपी के तहत परियोजनाओं को लागत के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर तकनीकी संस्थानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार का उद्देश्य निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना और गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता रोकना है।

100 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का ऑडिट करेंगे चार IIT

नई व्यवस्था के तहत 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं का क्वालिटी ऑडिट आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू वाराणसी, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी रुड़की करेंगे। अलग-अलग मंडलों को इन संस्थानों के बीच बांटा गया है।

कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या और देवीपाटन मंडल की परियोजनाओं का ऑडिट आईआईटी कानपुर करेगा। वहीं बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर मंडल की जिम्मेदारी आईआईटी बीएचयू वाराणसी को दी गई है।

मेरठ, अलीगढ़, झांसी और आगरा मंडल की परियोजनाओं का ऑडिट आईआईटी दिल्ली करेगा, जबकि सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली मंडल की परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच का जिम्मा आईआईटी रुड़की को सौंपा गया है।

25 से 100 करोड़ तक की परियोजनाओं की जांच प्रतिष्ठित संस्थानों को

25 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के ऑडिट के लिए भी सरकार ने अलग व्यवस्था लागू की है। प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी और मिर्जापुर मंडल की परियोजनाओं का ऑडिट एमएनआईटी प्रयागराज करेगा।

सहारनपुर, मुरादाबाद, मेरठ, अलीगढ़ और बरेली मंडल की जिम्मेदारी एएमयू अलीगढ़ को दी गई है। वहीं आगरा, कानपुर, झांसी और बांदा मंडल की परियोजनाओं का ऑडिट हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय कानपुर करेगा।

गोरखपुर, आजमगढ़, देवीपाटन और बस्ती मंडल की परियोजनाओं की जांच एमएमएमयूटी गोरखपुर करेगा।

25 करोड़ तक की परियोजनाओं की निगरानी करेंगे राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज

25 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की थर्ड पार्टी ऑडिट की जिम्मेदारी प्रदेश के विभिन्न राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों को दी गई है। इनमें आईईटी लखनऊ, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बांदा, सोनभद्र, कन्नौज, प्रतापगढ़, अंबेडकर नगर, आजमगढ़, मैनपुरी और बिजनौर समेत कई संस्थान शामिल हैं।

सरकार ने इन संस्थानों को मंडलवार जिम्मेदारी सौंपी है। पांच कॉलेजों को एक-एक मंडल, पांच कॉलेजों को दो-दो मंडल और एक कॉलेज को तीन मंडलों की परियोजनाओं का ऑडिट सौंपा गया है।

हर परियोजना का कम से कम पांच बार होगा निरीक्षण

एसओपी के मुताबिक संबंधित प्रशासकीय विभाग नामित संस्था के साथ एमओयू करेगा। ऑडिट करने वाली संस्था को परियोजना स्थल का न्यूनतम पांच बार निरीक्षण करना अनिवार्य होगा। निरीक्षण के एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट विभाग के नोडल अधिकारी को सौंपनी होगी।

रिपोर्ट में दिए गए सुझावों और खामियों को दूर कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और कार्यदाई संस्था की होगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्माण कार्यों में जवाबदेही तय होगी और गुणवत्ता में सुधार आएगा।

क्वालिटी ऑडिट के लिए तय की गई फीस

सरकार ने थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट के लिए फीस की दरें भी निर्धारित कर दी हैं। जीएसटी को छोड़कर मार्ग निर्माण की 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत का 0.30 प्रतिशत शुल्क तय किया गया है।

50 करोड़ से 300 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 0.20 प्रतिशत और 300 करोड़ से 600 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 0.10 प्रतिशत फीस लागू होगी। दीर्घ सेतु, पेयजल और सीवर पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए भी अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं। तकनीकी संस्थानों द्वारा किए जाने वाले सभी खर्च इसी शुल्क में शामिल होंगे।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.