श्रीलंका में सामूहिक कब्रगाह से लगातार मिल रहे नर कंकाल, खुदाई में अब तक 250 के करीब शव बरामद, गृहयुद्ध के दौर से जुड़ रहा मामला

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कोलंबो। श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र जाफना के पास स्थित चेम्मनी इलाके में कथित सामूहिक कब्रगाह की खुदाई के दौरान लगातार मानव कंकाल मिलने से सनसनी फैल गई है। खुदाई के तीसरे चरण में अब तक कुल 249 नर कंकाल बरामद किए जा चुके हैं। इस मामले को श्रीलंका के गृहयुद्ध और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे के दौर से जोड़कर देखा जा रहा है।

मानवाधिकार मामलों से जुड़े वकील रनीथा ज्ञानराजा ने जानकारी दी कि तीसरे चरण की खुदाई के दौरान मंगलवार तक 9 और कंकाल मिले हैं। इसके साथ ही बरामद कंकालों की संख्या बढ़कर 249 हो गई है। खुदाई में कुछ पुराने सिक्के और आभूषण जैसा एक धातु का टुकड़ा भी मिला है, जिसकी जांच की जा रही है।

लिट्टे संघर्ष के दौर से जुड़ रहा मामला

चेम्मनी का यह इलाका 1990 के दशक में लिट्टे और श्रीलंकाई सरकारी बलों के बीच चले भीषण संघर्ष के दौरान पहली बार चर्चा में आया था। उस दौर में हजारों लोगों के लापता होने और कथित तौर पर सामूहिक हत्याओं के आरोप लगे थे। इसी पृष्ठभूमि में इस कब्रगाह को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

साल 1998 में भी इसी क्षेत्र से करीब 15 कंकाल बरामद हुए थे, जिसके बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर मानव अवशेष मिलने से पुराने जख्म और सवाल दोनों फिर सामने आ गए हैं।

सात महीने बाद फिर शुरू हुई खुदाई

श्रीलंका की अदालत ने पिछले सप्ताह चेम्मनी स्थित इस कथित सामूहिक कब्रगाह की खुदाई दोबारा शुरू करने का आदेश दिया था। धन की कमी के कारण सितंबर 2025 में खुदाई का काम रोक दिया गया था। दूसरे चरण की खुदाई करीब 45 दिनों तक चली थी, जिसमें 240 कंकाल बरामद किए गए थे।

अदालत के आदेश के बाद अब न्यायिक निगरानी में तीसरे चरण की खुदाई जारी है। विशेषज्ञों की टीम बरामद कंकालों और अन्य वस्तुओं की वैज्ञानिक जांच में जुटी हुई है।

विकास कार्य के दौरान सामने आया था मामला

13 फरवरी 2025 को चेम्मनी इलाके में सामान्य विकास कार्य के दौरान कुछ मानव कंकाल मिलने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया था। इसके करीब एक सप्ताह बाद अदालत ने मामले के न्यायिक परीक्षण का आदेश दिया। इसके बाद 15 मई से खुदाई का पहला चरण शुरू किया गया था।

मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय तमिल समुदाय की नजर इस पूरे मामले पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ श्रीलंका के गृहयुद्ध काल से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

 

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