नई दिल्ली: आज की डिजिटल लाइफस्टाइल और बढ़ते प्रदूषण के बीच आंखों में जलन, खुजली, पानी आना और रेडनेस जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने के बाद हल्की जलन को लोग अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह कई बार गंभीर आंखों की समस्या का संकेत हो सकता है।
ऑप्थैलमोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. रश्मि मित्तल के अनुसार, यदि आंखों में बार-बार ड्राईनेस, चुभन या ऐसा महसूस हो कि कोई बाहरी कण मौजूद है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
आंखों की सुरक्षा परत कमजोर होना एक बड़ा कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक हमारी आंखों की सतह पर पानी, ऑयल और म्यूकस की एक सुरक्षात्मक परत होती है, जिसे टियर फिल्म कहा जाता है। यह आंखों को नम बनाए रखने और संक्रमण से बचाने में मदद करती है।
जब यह परत अस्थिर हो जाती है, तो आंखें सीधे हवा के संपर्क में आ जाती हैं, जिससे ड्राईनेस, जलन और असहजता बढ़ने लगती है।
डिजिटल आई स्ट्रेन से बढ़ रही समस्या
आज के समय में आंखों की समस्याओं का सबसे बड़ा कारण डिजिटल आई स्ट्रेन माना जा रहा है। लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन देखने से पलकें झपकाने की गति काफी कम हो जाती है।
कम पलकें झपकाने के कारण आंसू जल्दी सूख जाते हैं, जिससे आंखों में ड्राईनेस और चुभन महसूस होती है। लगातार ऐसा होने पर मीबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है, जिसमें आंखों की ऑयल ग्लैंड्स ठीक से काम करना बंद कर देती हैं।
प्रदूषण भी बढ़ा रहा आंखों की परेशानी
शहरी इलाकों में बढ़ता वायु प्रदूषण आंखों के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है। हवा में मौजूद धूल, धुआं और केमिकल सीधे आंखों की सतह को प्रभावित करते हैं।
लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से आंखों में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है, जिससे जलन और असहजता की समस्या और गंभीर हो जाती है।
एलर्जी और अन्य बीमारियां भी जिम्मेदार
धूल, पोलन, पालतू जानवरों के बाल और फफूंदी जैसी चीजें एलर्जी का कारण बन सकती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है। इसमें आंखों में तेज खुजली, सूजन और पानी आने की समस्या होती है।
इसके अलावा विटामिन-ए की कमी, डायबिटीज, साइनस एलर्जी और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर भी आंखों की जलन का कारण बन सकते हैं।
बिना सलाह आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक
कई लोग आंखों की जलन से राहत पाने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खासकर स्टेरॉयड आधारित ड्रॉप्स का गलत इस्तेमाल मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय
विशेषज्ञ 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं, जिसमें हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकंड तक देखना शामिल है। इसके अलावा पर्याप्त पानी पीना, पूरी नींद लेना और काम के दौरान जानबूझकर पलकें झपकाना भी आंखों के लिए फायदेमंद है।
यदि आंखों में जलन या दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो घरेलू उपायों के बजाय तुरंत किसी आई स्पेशलिस्ट से जांच कराना जरूरी है।