कलाई में जंजीर, हाथों में तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरी NDA महिला ब्रिगेड, पटना में विपक्ष के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश मार्च, गांधी मैदान से कारगिल चौक तक गूंजे नारे

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पटना में सोमवार को राजनीतिक तापमान उस समय और बढ़ गया जब एनडीए की महिला विंग ने कांग्रेस और विपक्षी दलों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्षी दलों पर असफलता और विरोध का आरोप लगाते हुए भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों की महिला कार्यकर्ताओं ने राजधानी की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन किया।

गांधी मैदान से निकला आक्रोश मार्च, हजारों महिलाओं की भागीदारी
राजधानी के गांधी मैदान, पटना से शुरू हुआ यह आक्रोश मार्च कारगिल चौक, पटना तक पहुंचा। भाजपा, जदयू, लोजपा, हम और रालोमो की महिला इकाइयों ने इसमें हिस्सा लिया। भारी भीड़ को देखते हुए पूरा इलाका जाम की स्थिति में पहुंच गया।

एक लाख महिलाओं के शामिल होने का दावा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दावा किया कि इस प्रदर्शन में एक लाख से अधिक महिलाएं शामिल हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश की नारी शक्ति के साथ अन्याय किया है।

सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष नजर
रविवार शाम से ही बिहार के विभिन्न जिलों से महिलाएं पटना पहुंचने लगी थीं। सुबह तक गांधी मैदान में भारी भीड़ जुट गई। गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की ताकि किसी की तबीयत खराब न हो।

नारेबाजी और ट्रैफिक पर असर
सुबह 11 बजे जैसे ही मार्च शुरू हुआ, महिलाएं हाथों में तिरंगा और स्लोगन कार्ड लेकर नारेबाजी करती नजर आईं। जेपी गोलंबर होते हुए भीड़ कारगिल चौक की ओर बढ़ी, जिससे शहर के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित हुआ। पटना ट्रैफिक पुलिस ने पहले से ही डायवर्जन प्लान लागू कर दिया था।

मंच से होगा राजनीतिक संबोधन
कारगिल चौक पर बनाए गए मंच से एनडीए के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सभा को संबोधित करेंगे। इसमें जदयू, लोजपा आर, हम और रालोमो की महिला नेता भी शामिल हैं।

महिला आरक्षण बिल बना सियासी मुद्दा
यह प्रदर्शन उस पृष्ठभूमि में हो रहा है जब केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में बहस के बाद पारित नहीं हो सका। एनडीए का आरोप है कि विपक्षी दलों के विरोध के कारण यह बिल पास नहीं हो पाया, जबकि विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है।

राजनीति में महिला शक्ति का बड़ा प्रदर्शन
एनडीए घटक दलों का कहना है कि विपक्ष ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को कमजोर किया है, जबकि यह बिल महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। इसी मुद्दे को लेकर अब एनडीए पूरे देश में अभियान तेज कर रहा है।

 

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