मनरेगा की जगह लागू होगी नई ग्रामीण रोजगार योजना VB-G RAM G, 1 जुलाई से देशभर में शुरू होने की तैयारी

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नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में रोजगार व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार बड़े बदलाव की तैयारी में है। सरकार 1 जुलाई 2026 से नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना VB-G RAM G लागू करने जा रही है, जो मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगी। इस नई योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, पारदर्शिता और विकास को और मजबूत करना बताया जा रहा है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को जानकारी दी है कि 25 राज्यों ने इस योजना के लिए अपना हिस्सा फंड जारी कर दिया है। सरकार का दावा है कि योजना को जुलाई से पूरे देश में लागू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

मनरेगा की जगह अब VB-G RAM G योजना

नई योजना का पूरा नाम ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G रखा गया है। इसके लागू होने के बाद ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

अब 100 की जगह मिलेंगे 125 दिन का रोजगार

नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि वर्तमान में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार मिलता है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।

स्मार्ट जॉब कार्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता

नई व्यवस्था में पारंपरिक जॉब कार्ड की जगह स्मार्ट रोजगार कार्ड जारी किए जाएंगे। इनमें फेस रिकग्निशन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी। जिन लाभार्थियों की e-KYC पूरी हो चुकी है, उनके पुराने कार्ड फिलहाल मान्य रहेंगे।

गांवों की जरूरत के हिसाब से तय होंगे काम

VB-G RAM G योजना के तहत ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसमें जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कों का निर्माण, आजीविका से जुड़े प्रोजेक्ट और आपदा प्रबंधन कार्य शामिल होंगे। हर गांव के लिए एक विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार किया जाएगा, जिसे ग्राम सभा की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।

केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च

इस योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करेंगी। सामान्य राज्यों में 60:40 का फंडिंग पैटर्न रहेगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में यह अनुपात 90:10 होगा। सरकार का अनुमान है कि इस योजना पर हर साल लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

मनरेगा के मौजूदा काम नहीं होंगे बंद

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मनरेगा के तहत चल रहे कार्य अचानक बंद नहीं किए जाएंगे। अधूरे प्रोजेक्ट्स को नई योजना में शामिल कर पूरा किया जाएगा, ताकि श्रमिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

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