महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद विपक्ष का पलटवार: राहुल गांधी बोले—यह महिलाओं का नहीं, राजनीतिक ढांचे को बदलने का प्रयास था
नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पास न हो पाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बिल को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुट पाने पर विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी का आरोप—संविधान पर हमले की कोशिश नाकाम
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष ने संविधान पर हुए कथित हमले को विफल कर दिया है। उनके मुताबिक यह विधेयक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक ढांचे को बदलने का एक प्रयास था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस मंशा को समझते हुए इसका विरोध किया।
प्रियंका गांधी बोलीं—सरकार ने बिल को खुद ही असंभव बना दिया
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि जिस तरीके से सरकार ने इस विधेयक को पेश किया, उससे इसका पास होना संभव ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़कर इसे जानबूझकर जटिल बनाया गया। उनके अनुसार यह सिर्फ महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र से जुड़ा विषय है और विपक्ष इसे इस रूप में स्वीकार नहीं कर सकता।
बीजेपी पर तीखा हमला, कई मुद्दों का जिक्र
प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन मुद्दों पर कार्रवाई की जरूरत थी, वहां सरकार की चुप्पी रही, लेकिन अब महिला अधिकारों की बात की जा रही है। उन्होंने इसे विरोधाभासी रुख बताया।
अखिलेश यादव का बयान—हम आरक्षण के पक्ष में, लेकिन शर्तों पर आपत्ति
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन विधेयक के साथ जुड़े प्रावधानों को लेकर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया, बल्कि उन पहलुओं का विरोध किया जो अधिकारों को सीमित कर सकते थे।
संख्या नहीं जुटा सकी सरकार, आंकड़ों में समझें स्थिति
विधेयक को पारित करने के लिए सदन में मौजूद 528 सांसदों में से 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन इसके पक्ष में 298 वोट ही पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। इसी वजह से यह महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका।