नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है और खरगे के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए बयान को “चौंकाने वाला और शर्मनाक” बताया और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
BJP का आरोप: बयान से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला, आचार संहिता का उल्लंघन
किरण रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री को “आतंकवादी” कहना न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने इसे आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग से त्वरित कार्रवाई की अपील की। बीजेपी का कहना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं और चुनावी माहौल को दूषित करते हैं।
क्या था खरगे का विवादित बयान?
दरअसल, चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने एआईएडीएमके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंधों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “वे मोदी के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? वो एक आतंकवादी हैं। वो समानता में विश्वास नहीं करते। उनकी पार्टी समानता और न्याय में भरोसा नहीं करती।” इस बयान के सामने आते ही बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे बेहद आपत्तिजनक करार दिया।
तमिलनाडु चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि कांग्रेस और डीएमके जैसे दल देश के लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी और एमके स्टालिन से माफी की मांग करते हुए कहा कि इस बयान से देश की जनता का अपमान हुआ है।
विवाद बढ़ने पर खरगे की सफाई
मामला तूल पकड़ने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। खरगे के मुताबिक, उन्होंने यह बात उस संदर्भ में कही थी जिसमें उन्होंने भाजपा सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि सरकार सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों और उम्मीदवारों को डराने के लिए कर रही है।
खरगे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से आतंकवादी नहीं कहा, बल्कि उनका आशय यह था कि सरकार की नीतियां और कार्रवाई विपक्ष में भय का माहौल बना रही हैं।