I-PAC को लेकर सियासत तेज: ओपी राजभर का सपा पर बड़ा हमला, बोले- ढाई महीने काम कराने के बाद क्यों तोड़ा रिश्ता?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी रणनीति और फंडिंग को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर साझा की गई लंबी पोस्ट में राजभर ने चुनावी रणनीति कंपनी I-PAC को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और सपा के साथ उसके संबंधों पर निशाना साधा।
ओपी राजभर ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने चुनावी अभियान के लिए I-PAC नाम की राजनीतिक रणनीति कंपनी को नियुक्त किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कंपनी को उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लिए पूरक काम करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
राजभर ने फंडिंग को लेकर लगाए गंभीर आरोप
सुभासपा अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक I-PAC की फंडिंग पश्चिम बंगाल में कथित कोयला घोटाले से जुड़े पैसों से की जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हवाला के जरिए यह पैसा उत्तर प्रदेश में कंपनी की शाखा तक पहुंचाया जाना था, जहां समाजवादी पार्टी के चुनावी अभियान की रणनीति पर काम चल रहा था।
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव के लिए स्थिति तब मुश्किल हो गई जब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी चुनाव हार गईं और कथित तौर पर फंडिंग रुक गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यही कारण रहा कि करीब ढाई महीने तक काम लेने के बाद समाजवादी पार्टी ने I-PAC से दूरी बना ली।
‘जवाब दीजिए अखिलेश जी’
ओपी राजभर ने अपनी पोस्ट में सीधे अखिलेश यादव को घेरते हुए लिखा, “इसका जवाब दीजिए अखिलेश जी?” उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। इसे चुनाव से पहले दबाव बनाने और राजनीतिक माहौल तैयार करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने फंड की कमी की बात स्वीकार की थी
दरअसल, इससे पहले इलेक्शन मैनेजमेंट कंपनियों पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने यह स्वीकार किया था कि समाजवादी पार्टी के पास संसाधनों और फंड की कमी है। उन्होंने कहा था कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी ने कुछ समय के लिए I-PAC को काम पर रखा था, लेकिन आर्थिक कारणों से यह व्यवस्था आगे जारी नहीं रखी जा सकी।
अखिलेश यादव ने कहा था कि कंपनी के साथ पार्टी का करार हुआ था और उसने कुछ महीनों तक काम भी किया, लेकिन चुनावी रणनीति पर भारी खर्च उठाना संभव नहीं था। उन्होंने यह भी तंज कसा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड और धार्मिक चंदे का बड़ा हिस्सा बीजेपी को मिल रहा है।
2027 में PDA के सहारे चुनाव जीतने का दावा
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने यह भी कहा था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग मिलकर बीजेपी को चुनौती देगा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी बीजेपी के नए चुनावी मॉडल के खिलाफ रणनीति तैयार करेगी ताकि लोकतंत्र को सुरक्षित रखा जा सके।