पॉलीहाउस खेती ने बदली महिला किसान की राह, 40 लाख के प्रोजेक्ट से अंतरा कुमारी ने शुरू की आधुनिक सब्जियों की खेती

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नोएडा: खेती में नई तकनीक और मेहनत के दम पर गौतमबुद्धनगर की अंतरा कुमारी ने कृषि के क्षेत्र में अलग राह चुनी है। दनकौर विकासखंड के सरकपुर गांव की रहने वाली अंतरा ने सरकारी योजना के सहयोग से 2,500 वर्गमीटर क्षेत्र में पॉलीहाउस स्थापित कर संरक्षित खेती शुरू की है। पॉलीहाउस में अलग-अलग तरह की सब्जियों की खेती कर वह खेती को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

दोस्तों को देखकर आया पॉलीहाउस खेती का विचार

अंतरा कुमारी ने बताया कि उनके आसपास हरियाणा और मेरठ में कुछ लोग पॉलीहाउस के जरिए खेती करते हैं। उन्हें देखकर उनके मन में भी इस तकनीक से खेती शुरू करने का विचार आया। सरकार के सहयोग से उन्होंने 2,500 वर्गमीटर क्षेत्र में पॉलीहाउस स्थापित किया।

अंतरा के मुताबिक, उन्हें जानवरों और पौधों से काफी लगाव है। इसी शौक को उन्होंने कारोबार का रूप देने का फैसला किया और आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया।

पहले शिमला मिर्च, अब इंग्लिश खीरे की खेती

पॉलीहाउस में अंतरा कुमारी पहले बेल पेपर यानी शिमला मिर्च की खेती कर चुकी हैं। इसमें करीब 6,000 पौधे लगाए गए थे। इस प्रयोग के सफल होने के बाद उन्होंने इस बार इंग्लिश खीरे की खेती शुरू की है, जिसमें भी करीब 6,000 पौधे लगाए गए हैं।

40 लाख के प्रोजेक्ट में सरकार और किसान की बराबर हिस्सेदारी

अंतरा कुमारी ने बताया कि पॉलीहाउस परियोजना की कुल लागत 40 लाख रुपये है। इसमें 20 लाख रुपये सरकार की ओर से अनुदान के रूप में मिले हैं, जबकि 20 लाख रुपये कृषक अंश के तौर पर उन्होंने लगाए हैं। परियोजना में कुल लागत का 50 प्रतिशत सहयोग उद्यान विभाग के माध्यम से अनुदान के रूप में दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि उन्हें यह अनुदान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मिला है। अंतरा का कहना है कि किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने में केंद्र और प्रदेश, दोनों सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

पॉलीहाउस खेती को बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी

अंतरा कुमारी अब अपने इस काम को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं। उनका कहना है कि वह पॉलीहाउस खेती को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना चाहती हैं। इसके साथ ही वह खुद की गौशाला शुरू करने की दिशा में भी काम कर रही हैं, ताकि जैविक खेती को अपने स्तर पर प्रोत्साहित किया जा सके।

नई तकनीक अपनाना आसान नहीं, लेकिन भरोसा जरूरी

अंतरा कुमारी के मुताबिक, किसान के लिए अपनी जमीन पर नई तकनीक अपनाना आसान फैसला नहीं होता। इसके लिए नई जानकारी, मेहनत और अपने फैसले पर भरोसा जरूरी है। खुले खेत में मौसम का सीधा असर फसलों पर पड़ता है, जबकि पॉलीहाउस जैसी तकनीक खेती को अधिक व्यवस्थित तरीके से करने का अवसर देती है।

इसी सोच के साथ उन्होंने संरक्षित खेती को अपनाया और अपनी कृषि भूमि पर अलग-अलग सब्जियों की खेती शुरू की। सरकारी योजना से मिले सहयोग और उनकी मेहनत ने सरकपुर में खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में नई शुरुआत की है।

महिला किसानों के लिए भी बन सकती है मिसाल

एक महिला किसान के रूप में अंतरा कुमारी का आधुनिक तकनीक को अपनाने का कदम ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी उदाहरण बन सकता है। 2,500 वर्गमीटर में तैयार पॉलीहाउस अब उनके खेत की पहचान बन चुका है, जहां संरक्षित तरीके से विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जा रही है।

अंतरा ने सरकारी योजना से मिले अवसर को अपनी मेहनत के साथ जोड़कर खेती को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। उनका लक्ष्य इस काम को लगातार विस्तार देना है, जिससे आधुनिक कृषि तकनीक के जरिए नए अवसर तैयार किए जा सकें।

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