यूपी पंचायत चुनाव की तैयारी तेज! योगी सरकार ने बनाया समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग, OBC आरक्षण पर करेगा बड़ा सर्वे

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का रास्ता अब लगभग साफ होता नजर आ रहा है। योगी सरकार ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है, जिसे पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्ग की हिस्सेदारी और आरक्षण व्यवस्था का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।

राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति छह महीने के लिए की गई है। हाल ही में योगी कैबिनेट ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी थी, जिसके बाद अब इसकी औपचारिक घोषणा कर दी गई है।

आयोग में रिटायर्ड जज और पूर्व IAS अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

सरकार की ओर से गठित इस आयोग में कई वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है। रिटायर्ड अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार और संतोष कुमार विश्वकर्मा को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके अलावा रिटायर्ड IAS अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह को भी आयोग में शामिल किया गया है।

सरकार का मानना है कि आयोग पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्ग के सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का निष्पक्ष अध्ययन करेगा और उसके आधार पर आरक्षण की नई रूपरेखा तैयार की जाएगी।

पंचायत स्तर पर होगा OBC हिस्सेदारी का सर्वे

समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग अलग-अलग जिलों में पिछड़े वर्ग की जनसंख्या, उनके प्रतिनिधित्व और वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेगा। आयोग पंचायत स्तर पर यह भी आकलन करेगा कि स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग की भागीदारी कितनी है और आरक्षण का लाभ किस स्तर तक पहुंच रहा है।

इसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर आगामी पंचायत चुनाव में आरक्षण की नई व्यवस्था लागू की जाएगी। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण की सीमा पहले से तय 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

रिपोर्ट के बाद पंचायत चुनाव प्रक्रिया को मिलेगी रफ्तार

राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से इस आयोग के गठन को योगी सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है। पंचायत चुनाव से पहले आयोग की रिपोर्ट बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण लागू होगा और उसके बाद पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी किए जाने का रास्ता साफ होगा।

प्रदेश में लंबे समय से पंचायत चुनाव की तैयारियों और आरक्षण व्यवस्था को लेकर चर्चा चल रही थी। अब आयोग के गठन के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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