यूपी की नई आबकारी नीति का बड़ा असर: देशी शराब की दुकानों पर अब मिलेगी ब्रांड की वैरायटी, सिंडिकेट पर लगेगी रोक, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना

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उत्तर प्रदेश में शराब कारोबार के ढांचे को बदलने के लिए नई आबकारी नीति लागू होने के साथ ही बड़े बदलाव सामने आए हैं। इस नीति का सबसे अहम उद्देश्य लंबे समय से चल रहे सिंडिकेट सिस्टम को खत्म करना और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में अब देशी शराब की दुकानों पर ग्राहकों को एक ही ब्रांड तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि अलग-अलग ब्रांड की वैरायटी उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

दुकानों पर 25% नए या अन्य ब्रांड रखना होगा अनिवार्य
नई नीति के तहत देशी शराब के अनुज्ञापियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी दुकानों पर कम से कम 25 प्रतिशत स्टॉक अन्य या नए ब्रांड का रखें। इसका उद्देश्य बाजार में किसी एक ब्रांड के एकाधिकार को खत्म करना और ग्राहकों को अधिक विकल्प देना है। प्रदेश में देशी शराब के एक हजार से अधिक ब्रांड मौजूद हैं, जिनमें पश्चिमी यूपी के जिलों में टि्वन टावर, जयवीरू, मिस्टर जामुन और मिस्टर एप्पल जैसे ब्रांड प्रमुख रूप से बिकते रहे हैं। इनमें टि्वन टावर की बिक्री सबसे अधिक मानी जाती है।

एकाधिकार खत्म, नियम उल्लंघन पर तय जुर्माना
नई आबकारी नीति से पहले दुकानदार आमतौर पर केवल सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड ही रखते थे, जिससे बाजार में एकाधिकार की स्थिति बन गई थी। अब इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। यदि कोई अनुज्ञापी 25 प्रतिशत अन्य ब्रांड का स्टॉक नहीं रखता है, तो उस पर 64 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इस बदलाव से खासतौर पर उन कारोबारियों को झटका लगा है, जिन्होंने हाल ही में इस क्षेत्र में प्रवेश किया है।

थोक और फुटकर विक्रेताओं के ऑफर और रिबेट पर रोक
नई नीति में थोक और फुटकर विक्रेताओं को मिलने वाले प्रोत्साहन भी खत्म कर दिए गए हैं। पहले शराब कंपनियां विक्रेताओं को माल खरीदने पर नकद छूट, उपहार और अन्य ऑफर देती थीं, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती थी। अब इस तरह की सभी रियायतों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यदि किसी अनुज्ञापी द्वारा ऐसे ऑफर लेने की पुष्टि होती है, तो उसका लाइसेंस तक निरस्त किया जा सकता है।

उधारी व्यवस्था खत्म, अब नकद भुगतान पर ही डिलीवरी
नई आबकारी नीति में भुगतान व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाने के लिए बदलाव किया गया है। पहले थोक गोदाम से फुटकर दुकानों को माल भेजे जाने के बाद एक सप्ताह के भीतर भुगतान किया जाता था। अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। नई प्रणाली के तहत पोर्टल पर माल का विवरण दर्ज करने के बाद पहले भुगतान करना होगा, तभी माल की डिलीवरी दी जाएगी।

 

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