सूर्य देव को तांबे के लोटे से ही क्यों दिया जाता है अर्घ्य? जानें धार्मिक मान्यता और इसके पीछे का विज्ञान
नई दिल्ली: वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह में सूर्य देव 15 मई को वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ ही वृषभ संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। यह दिन सूर्य उपासना और विशेष रूप से अर्घ्य देने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करने से विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
तांबे के लोटे से अर्घ्य देने की परंपरा क्यों है खास?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव को तांबा अत्यंत प्रिय धातु माना गया है। इसी कारण सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे का उपयोग करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
मान्यता है कि तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करने से सूर्य की ऊर्जा का सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है और व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास, मान-सम्मान और सफलता में वृद्धि होती है। यदि कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में हो तो यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
वृषभ संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 15 मई को वृषभ संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन पुण्य काल सुबह 05 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, जबकि महा पुण्य काल सुबह 05 बजकर 30 मिनट से 07 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस समय को सूर्य उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
अर्घ्य देते समय इन नियमों का पालन जरूरी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव को अर्घ्य देते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। अर्घ्य के समय “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
इसके अलावा अर्घ्य देने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना जरूरी माना गया है। बिना स्नान किए पूजा करने से उसका पूर्ण फल नहीं मिलता।
अर्घ्य देते समय जूते-चप्पल पहनना वर्जित माना गया है और इस दौरान मन में शुद्ध विचार रखने तथा किसी भी प्रकार के विवाद या नकारात्मक सोच से बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार लाभ
मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, स्वास्थ्य में सुधार आता है और कार्यक्षेत्र में सफलता के अवसर बढ़ते हैं।