मुजफ्फरपुर समेत बिहार के कई जिलों में रसोई गैस की किल्लत ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। कई जगहों पर गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी बंद हो गई है और वितरण केंद्रों से भी लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ताओं को गैस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और रसोई चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
दो दिनों से नहीं जला चूल्हा, गोदाम से भी नहीं मिला सिलेंडर
सहबाजपुर के सूरज कुमार के घर पिछले दो दिनों से गैस का चूल्हा नहीं जला है। घर पर गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं पहुंची तो वह सहबाजपुर चौक पर खुद सिलेंडर लेने पहुंचे, लेकिन मंगलवार को भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
मिठनपुरा के रंजीत कुमार की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने होली से पहले गैस के लिए बुकिंग कराई थी, लेकिन अब उन्हें दोबारा नंबर लगाने के लिए कहा जा रहा है। इसके बाद ही सिलेंडर मिलने की बात कही जा रही है।
पूरे जिले में गैस के लिए मची मारामारी
जिले के लगभग सभी इलाकों में रसोई गैस के लिए ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि खाड़ी देशों में जारी भीषण युद्ध के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। पहले जहां गैस बुकिंग के बाद लगभग 16 दिनों में सिलेंडर मिल जाता था, अब यह अवधि बढ़कर करीब 25 दिन तक पहुंच गई है। वहीं कई स्थानों पर घर तक सिलेंडर की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है।
फोन नहीं उठा रहे गैस वेंडर
उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस वेंडर फोन तक नहीं उठा रहे हैं। एजेंसी से भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। अधिकतर जगहों पर यही कहा जा रहा है कि गैस की किल्लत नहीं है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग नजर आ रही है।
ऐसे हालात में गैस की कालाबाजारी शुरू होने की आशंका भी जताई जा रही है। इस संबंध में विशेष शाखा की ओर से भी आशंका व्यक्त की गई है।
सुबह से ही वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें
मंगलवार सुबह सूरज निकलने से पहले ही कई वितरण केंद्रों पर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग गईं। घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पाया और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
सिलेंडर लेने को लेकर उपभोक्ताओं और कर्मियों के बीच कई जगहों पर तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। कई महिलाओं ने बताया कि गैस खत्म होने के डर से वे सुबह पांच बजे ही वितरण केंद्र पहुंच गई थीं। कुछ को सिलेंडर मिल गया, जबकि कई लोग निराश होकर लौटे।
युद्ध और आवंटन में कटौती से बढ़ी समस्या
एजेंसी संचालकों का कहना है कि जब तक गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं होगी, तब तक लंबित बुकिंग को पूरा करना मुश्किल रहेगा। उनका कहना है कि होली के दौरान कंपनियों की ओर से आवंटन में करीब 20 प्रतिशत की कटौती की गई थी, जिसका असर अभी भी बना हुआ है। पर्व के दौरान रिफिलिंग भी बंद रही और खाड़ी देशों में जारी युद्ध ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
फिलहाल हर एजेंसी पर एक हजार से अधिक सिलेंडरों का बैकलाग चल रहा है। जिन उपभोक्ताओं ने करीब दस दिन पहले बुकिंग कराई थी, उन्हें अब जाकर सिलेंडर मिल पा रहा है।
ई-केवाईसी और सर्वर की धीमी रफ्तार भी बनी परेशानी
एजेंसी संचालकों के अनुसार नए नियमों और ई-केवाईसी की प्रक्रिया ने भी समस्या को बढ़ा दिया है। सर्वर की धीमी रफ्तार और अनिवार्य सत्यापन की प्रक्रिया के कारण सिलेंडर वितरण की गति प्रभावित हो रही है, जिससे उपभोक्ताओं को और अधिक इंतजार करना पड़ रहा है।