राज्यसभा सांसदों का चुनाव कैसे होता है, जनता क्यों नहीं डालती वोट और यह सदन कभी भंग क्यों नहीं होता? समझिए पूरी प्रक्रिया

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भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के चुनाव अक्सर चर्चा में रहते हैं। लेकिन बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि राज्यसभा के सांसदों का चुनाव लोकसभा की तरह सीधे जनता नहीं करती। इसके लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें राज्यों की विधानसभाओं के विधायक वोट डालते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान ‘क्रॉस-वोटिंग’ और ‘प्रथम वरीयता वोट’ जैसे शब्द अक्सर सुनने को मिलते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि राज्यसभा में कितनी सीटें होती हैं, सांसदों का कार्यकाल कितना होता है और चुनाव की पूरी प्रक्रिया क्या है।

राज्यसभा में कुल कितने सदस्य होते हैं

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। फिलहाल इस सदन में 245 सदस्य हैं। इनमें से 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं। जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है। ये नामित सदस्य आमतौर पर कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वाले लोग होते हैं।

राज्यसभा कभी भंग क्यों नहीं होती

राज्यसभा को संसद का स्थायी सदन कहा जाता है, क्योंकि इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता। राज्यसभा के हर सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है। हालांकि सभी सदस्य एक साथ नहीं बदलते। सदन की निरंतरता बनाए रखने के लिए हर दो साल में राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव कराया जाता है।

कैसे होता है राज्यसभा सांसदों का चुनाव

राज्यसभा के चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होते हैं। इसमें देश की जनता सीधे वोट नहीं डालती। इसके बजाय संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के विधायक वोट देते हैं। चुनाव एक विशेष प्रणाली के आधार पर होता है, जिसे ‘एकल संक्रमणीय मत प्रणाली’ यानी सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहा जाता है।

इस प्रणाली में विधायक मतपत्र पर उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार वरीयता देते हैं। यानी वे उम्मीदवारों के सामने 1, 2, 3 जैसे नंबर लिखते हैं। इसमें ‘1’ का मतलब पहली पसंद होता है।

जीत के लिए कितने वोट जरूरी होते हैं

राज्यसभा चुनाव में जीतने के लिए उम्मीदवार को वोटों का एक तय कोटा हासिल करना होता है। यह कोटा एक विशेष गणना पद्धति से तय किया जाता है।

मान लीजिए किसी राज्य में 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है और वहां विधानसभा में कुल 403 विधायक हैं। ऐसे में कुल विधायकों की संख्या 403 को खाली सीटों की संख्या में 1 जोड़कर यानी 11 से भाग दिया जाता है। इसका परिणाम 36.63 आता है। दशमलव को हटाकर 36 लिया जाता है और इसमें 1 जोड़ दिया जाता है। इस तरह किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 37 विधायकों के पहली वरीयता वाले वोट चाहिए होते हैं।

वोटों की गिनती कैसे होती है

राज्यसभा चुनाव में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली लागू होती है। अगर किसी उम्मीदवार को तय कोटे से ज्यादा वोट मिल जाते हैं, तो उसके अतिरिक्त वोट उन उम्मीदवारों को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं जिन्हें मतपत्र पर दूसरी वरीयता दी गई होती है।

क्रॉस-वोटिंग को रोकने के लिए विधायकों को अपना वोट मतपेटी में डालने से पहले अपने दल के अधिकृत एजेंट को दिखाना होता है। इसके बाद ही वोट को वैध माना जाता है।

 

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