ईरान युद्ध में अमेरिका को भारी सैन्य झटका, चीन-रूस के खिलाफ सुरक्षित रखा गया हथियार भंडार भी हुआ खाली, अरबों डॉलर का नुकसान सामने आया
वॉशिंगटन से सामने आई एक बड़ी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के साथ सैन्य टकराव ने अमेरिका की युद्ध क्षमता पर गंभीर दबाव डाल दिया है। पेंटागन के आकलन के मुताबिक, इस संघर्ष में अमेरिकी सेना ने अपने अत्यधिक महंगे और रणनीतिक हथियारों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर दिया, जिससे उसका भंडार काफी हद तक खाली हो गया है।
चीन और रूस के खिलाफ सुरक्षित हथियार भी इस्तेमाल करने पर मजबूर अमेरिका
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने जिन हथियारों को चीन और रूस जैसे संभावित बड़े दुश्मनों के खिलाफ सुरक्षित रखा था, उन्हें भी इस संघर्ष में इस्तेमाल करना पड़ा। इसमें टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें और पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं, जिन्हें अमेरिका की रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा माना जाता है।
अरबों डॉलर का खर्च, रोजाना करीब 1 अरब डॉलर की खपत का अनुमान
अब तक इस सैन्य अभियान की आधिकारिक लागत सामने नहीं आई है, लेकिन स्वतंत्र आकलनों के अनुसार इसका कुल खर्च 28 अरब डॉलर से 35 अरब डॉलर के बीच बताया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि शुरुआती दो दिनों में ही करीब 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल किए गए।
हजारों मिसाइलों का इस्तेमाल, भंडार पर पड़ा भारी असर
जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने लगभग 1100 से अधिक JASSM-ER मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जिनकी मारक क्षमता 600 मील से अधिक बताई जाती है। इसके अलावा 1000 से अधिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागी गईं, जबकि 1200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का भी उपयोग किया गया।
टॉमहॉक मिसाइल को अमेरिका की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता का अहम हथियार माना जाता है और इसकी कीमत लगभग 3.6 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट है। वहीं पैट्रियट इंटरसेप्टर की कीमत 4 मिलियन डॉलर से अधिक बताई गई है।
हथियार उत्पादन और भंडार पर संकट के संकेत
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका के पास अब केवल सीमित संख्या में टॉमहॉक मिसाइलें ही बची हैं और वार्षिक उत्पादन भी इस भारी खपत के मुकाबले बेहद कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर पर भंडार को फिर से भरने में कई साल लग सकते हैं।
पेंटागन ने मांगा अतिरिक्त बजट, कांग्रेस की मंजूरी का इंतजार
पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस से अतिरिक्त फंड की मांग की है ताकि हथियारों का उत्पादन बढ़ाकर भंडार को फिर से मजबूत किया जा सके। हालांकि अभी इस पर अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट को बताया गलत
दूसरी ओर व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है और उसके पास पर्याप्त हथियार और गोला-बारूद मौजूद हैं, जिससे वह किसी भी स्थिति में अपनी सुरक्षा और सैन्य अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है।