संभल: सीबीएसई 12वीं परीक्षा के परिणाम में संभल जिले की छात्राओं और छात्रों ने शानदार प्रदर्शन कर सफलता की नई मिसाल पेश की है। जिले में प्रथम स्थान हासिल करने वाली हेमका वार्ष्णेय की सफलता अब चर्चा का विषय बन गई है। खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के सिर्फ 6 से 7 घंटे नियमित पढ़ाई कर यह उपलब्धि हासिल की। हेमका ने अपनी सफलता का मंत्र भी साझा किया, जो अब दूसरे छात्रों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
बबराला की रहने वाली हेमका वार्ष्णेय ने बताया कि उन्होंने प्री-बोर्ड परीक्षा की तैयारी को बेहद गंभीरता से लिया था और उसी पर विशेष ध्यान देने का फायदा अंतिम परीक्षा में मिला। उनका कहना है कि नियमित पढ़ाई और आत्मविश्वास ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर करना चाहती हैं MBA
गुन्नौर के मोहल्ला सराय निवासी और व्यापार मंडल से जुड़े मनोज वार्ष्णेय की बेटी हेमका वार्ष्णेय भविष्य में दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीएससी ऑनर्स करने के बाद एमबीए करना चाहती हैं। उनका सपना किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने का है।
हेमका ने बताया कि उनकी इस सफलता में माता काजल वार्ष्णेय, पिता मनोज वार्ष्णेय, परिवार और गुरुजनों का बड़ा योगदान रहा है। तीन बहनों में तीसरे नंबर की हेमका का एक भाई भी है, जो डीएवी फर्टिलाइजर बबराला में 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है।
ध्रुव ने टाइम टेबल बनाकर हासिल किया दूसरा स्थान
वहीं चंदौसी के ओपीजीएम स्कूल के छात्र ध्रुव कुमार ने 97.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। ध्रुव का सपना सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का है। उन्होंने गणित विषय में 98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।
ध्रुव ने बताया कि वह रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ाई करते थे और साथ ही ऑनलाइन कोचिंग भी लेते थे। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज अनुशासन और सही टाइम टेबल है। स्कूल में जो पढ़ाया जाता था, उसे घर आकर दोबारा पढ़ते थे और लगातार सैंपल पेपर हल करते थे।
ध्रुव ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और दादी भगवानदेयी को दिया, जो हमेशा उन्हें प्रेरित करती थीं। उनके पिता प्रदीप कुमार बुलंदशहर के इंटर कॉलेज में प्रवक्ता हैं, जबकि मां सुषमा गृहिणी हैं। ध्रुव को पढ़ाई के साथ-साथ शतरंज और क्रिकेट खेलना भी पसंद है।
डॉक्टर बनना चाहती हैं गुल सरताज
संभल के दीपा सराय निवासी गुल सरताज ने 97 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वह एचएम ग्लोबल स्कूल की छात्रा हैं और भविष्य में डॉक्टर बनना चाहती हैं।
गुल सरताज ने बताया कि उनकी इस सफलता के पीछे परिवार और शिक्षकों का मार्गदर्शन सबसे बड़ी ताकत रहा। उन्होंने कहा कि लगातार मेहनत और शिक्षकों के सही मार्गदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।