नई दिल्ली: देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और आवारा कुत्तों की समस्या पर आज सुप्रीम कोर्ट अहम फैसला सुनाने जा रहा है। इस मामले पर लंबे समय से सुनवाई चल रही थी और अब लोगों की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही संकेत दे चुका है कि अगर किसी आवारा कुत्ते के हमले में चोट या मौत होती है तो स्थानीय निकायों के साथ-साथ कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
जनवरी में सुरक्षित रखा गया था फैसला
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने 29 जनवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान राज्यों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने भी अदालत के सामने अपना पक्ष रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी सख्त नाराजगी
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसा नहीं हो सकता कि कोई व्यक्ति रोजाना कुत्तों को खाना खिलाए लेकिन जब वही कुत्ता किसी इंसान पर हमला करे तो उसकी कोई जिम्मेदारी न बने।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है और जिम्मेदारी तय करने से अदालत पीछे नहीं हटेगी।
असम के आंकड़ों पर कोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने असम में डॉग बाइट के मामलों के आंकड़ों पर भी गंभीर चिंता जताई थी। अदालत के मुताबिक वर्ष 2024 में कुत्तों के काटने की 1.66 लाख घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2025 में केवल जनवरी महीने में ही 20,900 मामले सामने आए।
कोर्ट ने इन आंकड़ों को “भयावह” बताते हुए राज्यों को चेतावनी दी थी कि अस्पष्ट जवाब देने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
हाईवे, स्कूल और अस्पतालों के आसपास से हटाने के निर्देश
7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्यों और NHAI को निर्देश दिया था कि हाईवे, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के आसपास से आवारा जानवरों को हटाया जाए।
हालांकि अदालत ने यह भी कहा था कि जो कुत्ते आक्रामक नहीं हैं और जिनमें रेबीज नहीं है, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुई थी सुनवाई
आवारा कुत्तों का यह मामला 28 जुलाई 2025 को तब शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में डॉग अटैक और मौतों के मामलों पर स्वतः संज्ञान लिया था।
उस दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें आवारा कुत्ते बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर हमला करते दिखाई दिए थे।
इसके बाद 11 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से 8 हफ्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था। हालांकि इस फैसले के खिलाफ डॉग लवर्स और पशु प्रेमी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद अदालत ने 22 अगस्त को अपने आदेश में बदलाव किया था।
आज के फैसले पर टिकी देशभर की नजरें
अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले से यह साफ हो जाएगा कि आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए प्रशासन, स्थानीय निकायों और डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी किस तरह तय की जाएगी।