अमेरिका-ईरान परमाणु डील पर बड़ा सस्पेंस: इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता पर ईरान ने जताया भरोसे का संकट, पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल तेज

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इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में प्रस्तावित इस अहम बैठक पर अब अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि ईरान ने फिलहाल वार्ता को लेकर अपनी सहमति नहीं दी है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय राजनीति और मध्यस्थता की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक पर ईरान का रुख सख्त

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर होने वाली बातचीत इस्लामाबाद में तय की गई थी, लेकिन ईरान ने अब तक इस प्रस्ताव पर अंतिम मंजूरी नहीं दी है। इस कारण बैठक किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट होने की संभावना भी जताई जा रही है। पाकिस्तान की ओर से वार्ता को लेकर उम्मीदें बरकरार हैं, लेकिन ईरान की तरफ से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं।

पाकिस्तान पर भरोसे की कमी के पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं

विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पाकिस्तान पर भरोसा न करने के पीछे कई अहम वजहें सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि हालिया संघर्षों के दौरान पाकिस्तान की सीमित प्रतिक्रिया ने ईरान की चिंताओं को बढ़ाया है। इसके अलावा यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान इस प्रक्रिया में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा पाएगा या नहीं।

एक अन्य कारण यह भी बताया जा रहा है कि ईरान को यह आशंका है कि किसी भी समझौते के उल्लंघन की स्थिति में पाकिस्तान प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाएगा। साथ ही क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन और वैश्विक शक्तियों के प्रभाव को लेकर भी ईरान सतर्क है।

पूर्व और मौजूदा विशेषज्ञों की राय में भी उठे सवाल

कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार ईरान को पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर संदेह है। उनका मानना है कि ईरान यह मानता है कि पाकिस्तान की विदेश नीति पर बाहरी प्रभाव अधिक है, जिससे उसकी स्वतंत्र भूमिका सीमित हो सकती है। कुछ पूर्व ईरानी अधिकारियों ने भी पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तटस्थता बेहद जरूरी होती है।

आसिम मुनीर की कूटनीतिक कोशिशों को झटका

इस पूरे मामले में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका भी चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने हाल ही में तेहरान का दौरा कर वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी और अमेरिकी पक्ष से भी संवाद बनाए रखा था। हालांकि, अंतिम समय में ईरान के पीछे हटने से इस प्रयास को बड़ा झटका माना जा रहा है।

वार्ता पर अनिश्चितता बरकरार

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच इस प्रस्तावित परमाणु वार्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस्लामाबाद में बैठक होगी या किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित की जाएगी, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पूरी प्रक्रिया अब कूटनीतिक स्तर पर और अधिक जटिल होती दिखाई दे रही है।

 

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