नई दिल्ली: हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग ने बड़ा आंकड़ा जारी किया है। आयोग के मुताबिक इन चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी बेहद उत्साहजनक रही और कई राज्यों में महिलाओं ने मतदान प्रतिशत के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। सबसे ज्यादा मतदान पश्चिम बंगाल में दर्ज किया गया, जहां कुल 93.71 प्रतिशत वोटिंग हुई।
निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल के 293 विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना पूरी हो चुकी है। यहां डाक मतपत्रों सहित 6.38 करोड़ से अधिक वोट डाले गए, जबकि कुल मतदाताओं की संख्या 6.81 करोड़ से ज्यादा थी।
बंगाल में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा किया मतदान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी 93.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 92.06 रहा। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े इसमें शामिल नहीं हैं, क्योंकि वहां पुनर्मतदान होना बाकी है।
तमिलनाडु में भी महिलाओं की शानदार भागीदारी
निर्वाचन आयोग के मुताबिक तमिलनाडु में कुल 85.01 प्रतिशत मतदान हुआ। राज्य में 5.74 करोड़ मतदाताओं में से करीब 4.8 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
यहां महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 86.2 रहा, जबकि पुरुषों में यह 83.77 प्रतिशत दर्ज किया गया। तमिलनाडु में चुनावी मुकाबला भी काफी बड़ा रहा, जहां 234 सीटों पर कुल 4,023 उम्मीदवार मैदान में उतरे। यानी हर सीट पर औसतन 17 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। एक सीट पर तो 79 प्रत्याशी तक मैदान में थे।
असम और केरल में भी दिखा जबरदस्त उत्साह
असम में कुल मतदान प्रतिशत 85.74 दर्ज किया गया। यहां 2.15 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने वोट डाले। महिला मतदाताओं की भागीदारी 86.53 प्रतिशत रही, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 84.95 प्रतिशत था।
केरल में 78.11 प्रतिशत मतदान हुआ और यहां 2.12 करोड़ से अधिक वोट पड़े। महिलाओं की भागीदारी 81.17 प्रतिशत रही, जबकि पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 74.9 दर्ज किया गया।
पुडुचेरी में भी महिलाओं ने दिखाई ताकत
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कुल 89.82 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां महिला मतदाताओं की भागीदारी 91.39 प्रतिशत रही। इस चुनाव में 8.5 लाख से अधिक वोट डाले गए।
महिला विधायकों की संख्या अब भी सीमित
मतदान में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बावजूद निर्वाचित प्रतिनिधियों में उनकी संख्या अब भी सीमित रही। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में केवल 23 महिला विधायक चुनी गईं, जो कुल संख्या का 9.83 प्रतिशत है।
पश्चिम बंगाल की 293 सदस्यीय विधानसभा में 37 महिलाएं निर्वाचित हुईं, जो 12.62 प्रतिशत है। वहीं केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में सिर्फ 11 महिला विधायक जीत सकीं, जो 7.85 प्रतिशत है।
तीसरे लिंग के उम्मीदवारों को नहीं मिली सफलता
इन चुनावों में केवल दो तृतीय लिंग उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। इनमें एक तमिलनाडु और एक केरल से चुनाव लड़ रहा था। हालांकि दोनों उम्मीदवार चुनाव हार गए और उनकी जमानत जब्त हो गई।
मतदान केंद्रों और उम्मीदवारों के आंकड़े भी आए सामने
निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 85,092 मतदान केंद्र बनाए गए। इसके बाद तमिलनाडु में 75,064 और असम में 31,490 मतदान केंद्र स्थापित किए गए।
उम्मीदवारों की संख्या के मामले में केरल सबसे नीचे रहा, जहां 140 सीटों के लिए केवल 883 उम्मीदवार मैदान में थे। वहीं पश्चिम बंगाल में 293 सीटों पर 2,920 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा।
NOTA को मिले कम वोट
आंकड़ों के अनुसार राज्यों में NOTA यानी ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ विकल्प को अपेक्षाकृत कम वोट मिले। तमिलनाडु में सबसे कम 0.4 प्रतिशत वोट NOTA को मिले, जबकि असम में यह आंकड़ा 1.23 प्रतिशत रहा।
पश्चिम बंगाल में 0.78 प्रतिशत मतदाताओं ने NOTA चुना। वहीं पुडुचेरी में 0.77 प्रतिशत और केरल में 0.57 प्रतिशत मतदाताओं ने इस विकल्प का इस्तेमाल किया।