नई दिल्ली: देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे ज्ञानेश कुमार इन दिनों सिर्फ प्रशासनिक हलकों में ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा के केंद्र में हैं। इसकी वजह सिर्फ उनका पद नहीं, बल्कि उनका असाधारण पारिवारिक बैकग्राउंड है, जिसे ‘ब्यूरोक्रेसी का पावरहाउस’ कहा जा रहा है। परिवार में बड़ी संख्या में आईएएस, आईआरएस, आईपीएस अधिकारी और डॉक्टर शामिल हैं, जो इसे एक अलग पहचान देते हैं।
परिवार में अफसरों और डॉक्टरों की लंबी सूची
ज्ञानेश कुमार का परिवार अपनी उपलब्धियों के कारण खास माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिवार में 5 आईएएस अधिकारी, 1 आईआरएस, 1 आईपीएस, 1 आईटी अधिकारी (आईआरएस) और 3 डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट शामिल हैं। इसके अलावा परिवार में 28 सदस्य डॉक्टर हैं। यह परिवार मेहनत, योग्यता और सेवा की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह भी है कि उनकी दोनों बेटियों की शादी प्रशासनिक सेवा की ट्रेनिंग के दौरान हुई दोस्ती से शुरू होकर विवाह तक पहुंची।
बेटियां और दामाद भी प्रशासनिक सेवा में
ज्ञानेश कुमार की बड़ी बेटी मेधा रूपम आईएएस अधिकारी हैं और उन्हें नोएडा की पहली महिला डीएम होने का गौरव प्राप्त है। उनके पति मनीष बंसल भी आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में आगरा के डीएम के रूप में तैनात किए गए हैं। वहीं छोटी बेटी अभिश्री आईआरएस अधिकारी हैं और उनके पति अक्षय लबरू श्रीनगर में डीएम पद संभाल रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी सिविल सेवा से जुड़े हैं, जिससे यह परिवार प्रशासनिक क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है।

आगरा से शुरू हुआ सफर
ज्ञानेश कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ। उनके पिता डॉ. सुबोध कुमार गुप्ता चीफ मेडिकल ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि उनकी मां सत्यवती गुप्ता योगाचार्या हैं। पिता की सरकारी नौकरी के चलते उनका स्थानांतरण होता रहा, जिसके कारण ज्ञानेश कुमार की पढ़ाई गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर में हुई। उन्होंने 12वीं की शिक्षा लखनऊ के काल्विन तालुकेदार कॉलेज से पूरी की, जहां वे टॉपर रहे। वाराणसी के क्वींस कॉलेज में भी उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
इंजीनियरिंग से सिविल सेवा तक का सफर
परिवार में डॉक्टरों की परंपरा के बावजूद ज्ञानेश कुमार ने अलग राह चुनी और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद दिल्ली में रहकर सिविल सेवा की तैयारी शुरू की और इस दौरान लगभग एक वर्ष तक हुडको में कार्य भी किया।
1988 बैच के आईएएस, अहम जिम्मेदारियां निभाईं
ज्ञानेश कुमार ने 1988 में सिविल सेवा परीक्षा पास की और केरल कैडर के आईएएस अधिकारी बने। उनकी पहली नियुक्ति तिरुवनंतपुरम में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में हुई। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है। वर्ष 2007 से 2012 के बीच उन्होंने केंद्र सरकार में रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2014 में उन्हें केरल सरकार का दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर बनाया गया।

इराक से भारतीयों की वापसी में निभाई अहम भूमिका
आईएसआईएस की हिंसक गतिविधियों के दौरान ज्ञानेश कुमार ने इराक में फंसे 183 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनमें इरबिल में फंसी 46 मलयाली नर्सें भी शामिल थीं। यह ऑपरेशन उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
परिवार की जड़ें और वर्तमान स्थिति
आगरा के विजय नगर कॉलोनी में रहने वाले उनके परिवार को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां उनके परिवार के 28 सदस्य डॉक्टर हैं। उनकी मां आज भी योग सिखाने का कार्य करती हैं। परिवार में उनके भाई मनीष कुमार आईआरएस अधिकारी हैं, जबकि बहन रोली इंदौर में एक विद्यालय संचालित करती हैं। बहन के पति उपेंद्र जैन आईपीएस अधिकारी हैं। ज्ञानेश कुमार जनवरी 2024 में सहकारिता मंत्रालय में सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे।