ODI विश्व कप 2011 से रोहित शर्मा क्यों हुए बाहर? पूर्व सिलेक्टर ने सालों बाद खोला राज, चयन की रणनीति बनी बड़ी वजह
वनडे विश्व कप 2011 भारतीय क्रिकेट इतिहास का स्वर्णिम अध्याय रहा, लेकिन इस ऐतिहासिक जीत में एक बड़ा नाम शामिल नहीं था—रोहित शर्मा। 2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले रोहित उस टीम का हिस्सा नहीं बन पाए, जिसने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत को चैंपियन बनाया। यह सवाल लंबे समय से चर्चा में रहा कि आखिर रोहित को उस विश्व कप टीम से बाहर क्यों रखा गया था। अब इस पर तत्कालीन मुख्य चयनकर्ता कृष्णम्माचारी श्रीकांत ने खुलकर बात की है।
विश्व कप से ठीक पहले टीम से बाहर, फिर अचानक वापसी
साल 2011 की शुरुआत तक रोहित शर्मा भारतीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन विश्व कप टीम के चयन से पहले उन्हें बाहर कर दिया गया। जनवरी 2011 तक टीम में रहने के बाद अचानक उनका नाम फाइनल स्क्वाड से गायब हो गया। मार्च-अप्रैल में जब भारत में विश्व कप खेला गया, तब रोहित टीम का हिस्सा नहीं थे। हालांकि टूर्नामेंट खत्म होने के बाद जून 2011 में उनकी टीम में वापसी हो गई थी, जिससे यह सवाल और गहरा गया कि आखिर चयन के दौरान ऐसा क्या हुआ।
‘हाफ ऑलराउंडर’ रणनीति ने रोहित का रास्ता रोका
इस पूरे मामले पर कृष्णम्माचारी श्रीकांत ने खुलासा करते हुए बताया कि चयन समिति की रणनीति ही रोहित के बाहर होने की सबसे बड़ी वजह बनी। उन्होंने कहा कि चयनकर्ता टीम में ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता देना चाहते थे, जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी योगदान दे सकें। इसी सोच के तहत ‘हाफ ऑलराउंडर’ खिलाड़ियों को ज्यादा महत्व दिया गया। श्रीकांत ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें आज तक इस फैसले का मलाल है और उन्होंने रोहित शर्मा से इसके लिए माफी भी मांगी थी।
1983 की तर्ज पर टीम बनाने की कोशिश
श्रीकांत के मुताबिक चयनकर्ताओं ने 1983 विश्व कप जीतने वाली टीम की रणनीति को ध्यान में रखते हुए 2011 की टीम तैयार की थी। उस ऐतिहासिक टीम में ज्यादातर खिलाड़ी ऑलराउंड क्षमता वाले थे। इसी मॉडल को दोहराने की कोशिश में 2011 की टीम बनाई गई, जिसमें ऐसे खिलाड़ियों को तरजीह दी गई जो दोनों विभागों में योगदान दे सकें।
ऑलराउंडर्स ने दिलाई थी भारत को जीत
श्रीकांत ने उदाहरण देते हुए बताया कि 2011 विश्व कप में युवराज सिंह ने बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने। इसके अलावा वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर और सुरेश रैना ने भी जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी की। यूसुफ पठान जैसे खिलाड़ी भी टीम में मौजूद थे, जो बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में योगदान देने की क्षमता रखते थे।
उन्होंने माना कि इन सभी कारणों के चलते रोहित शर्मा जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज को जगह नहीं मिल पाई, जबकि वह उस समय विश्व कप खेलने के पूरी तरह हकदार थे। यह चयन रणनीति ही उनके बाहर होने की सबसे बड़ी वजह बनी, जो आज भी चर्चा का विषय है।