नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी, बालेन शाह के नए भंसार नियमों के बाद भारत भी करेगा हर आवाजाही पर कैमरों से निगरानी, शुरू होगा फेस रिकग्निशन सिस्टम
नई दिल्ली। भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही को लेकर दोनों देशों की ओर से सख्ती बढ़ती नजर आ रही है। नेपाल की ओर से नए भंसार नियम लागू किए जाने के बाद अब भारत ने भी सीमा पर निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत आने-जाने वाले लोगों पर कैमरों और फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए नजर रखी जाएगी।
नेपाल की तरफ से कस्टम ड्यूटी में सख्ती
जानकारी के मुताबिक नेपाल की सीमा पर तैनात आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) अब 100 नेपाली रुपये यानी करीब 62 रुपये से अधिक मूल्य का सामान ले जाने पर यात्रियों से कस्टम ड्यूटी वसूल रही है। इसके साथ ही नेपाल सरकार की ओर से 659 पन्नों की विस्तृत सूची भी जारी की गई है, जिसमें खाने-पीने सहित विभिन्न वस्तुओं पर लगने वाली ड्यूटी का ब्यौरा दिया गया है।
भारत में शुरू होगा फेस रिकग्निशन सिस्टम
इसी बीच भारत सरकार की ओर से भारत-नेपाल सीमा पर फेस रिकग्निशन सिस्टम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस सिस्टम के जरिए सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और उनकी पहचान को डेटाबेस में सुरक्षित रखा जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट सोनौली बॉर्डर से शुरू
सूत्रों के अनुसार यह प्रोजेक्ट फिलहाल पायलट आधार पर लागू किया जा रहा है। इसे भारत-नेपाल के 22 बॉर्डर प्वाइंट्स में से उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में स्थित सोनौली बॉर्डर से शुरू किया गया है। इस सिस्टम के तहत सीमा पार करने वाले लोगों की तस्वीरें और डाटा रिकॉर्ड किया जाएगा।
यात्रा का पूरा रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित
नई व्यवस्था के तहत नेपाल से भारत आने और भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों की पहचान और उनकी यात्रा का पूरा रिकॉर्ड सरकार के डेटाबेस में सुरक्षित रहेगा। जब भी कोई व्यक्ति दोबारा सीमा पार करेगा, तो उसकी पिछली यात्रा से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध रहेगी।
नेपाल जाने में सख्ती, भारत आने में प्रक्रिया सामान्य
वर्तमान स्थिति में भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों को कुछ नई प्रक्रियाओं के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि नेपाल से भारत आने वालों के लिए पहले जैसी जांच प्रक्रिया ही जारी है। सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) सामान्य नियमों के तहत जांच कर लोगों को आवाजाही की अनुमति दे रही है।
डेटा सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम
अधिकारियों के अनुसार फेस रिकग्निशन सिस्टम का उद्देश्य सीमा पार गतिविधियों पर नजर रखना और एक सुरक्षित डेटाबेस तैयार करना है, जिससे भविष्य में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।