खरीफ 2026 के लिए प्रमाणित और संकर बीज वितरण शुरू, 10 मई तक ऑनलाइन बुकिंग का मौका; किसानों को समय पर आवेदन की सलाह
गौतमबुद्धनगर, 29 अप्रैल 2026। जनपद के किसानों के लिए खरीफ सीजन को लेकर बड़ी पहल की गई है। कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के तहत प्रमाणित और संकर बीजों के वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उप कृषि निदेशक ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना है।
धान से लेकर दालों तक कई फसलों के बीज उपलब्ध
योजना के तहत सामान्य बीज वितरण में धान (बासमती), संकर धान, संकर बाजरा, संकर ज्वार, संकर मक्का, ढैंचा, मूंग, उड़द और अरहर के बीज शामिल किए गए हैं। इसके अलावा मिनीकिट बीज वितरण कार्यक्रम के अंतर्गत सांवा, कोदो, रागी, संकुल ज्वार, मूंग, उड़द, अरहर और संकर बाजरा के बीज भी किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी बीज प्रमाणित या संकर श्रेणी के होंगे, जिससे बेहतर अंकुरण और अधिक उत्पादन की संभावना बढ़ेगी।
10 मई तक ही होगी ऑनलाइन बुकिंग, अंतिम तिथि के बाद मौका नहीं
किसानों की सुविधा के लिए बीज बुकिंग की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक किसान कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर 10 मई 2026 तक बीजों की बुकिंग कर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
पंजीकरण अनिवार्य, मोबाइल या जन सेवा केंद्र से कर सकते हैं आवेदन
बीज बुकिंग के लिए किसानों का कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है। जिन किसानों का पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है, उन्हें जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। किसान अपने एंड्रॉयड मोबाइल फोन के माध्यम से या नजदीकी जन सेवा केंद्र/जन सुविधा केंद्र के जरिए भी पंजीकरण और बुकिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
उपलब्धता के आधार पर होगा बीज आवंटन
अधिकारियों के अनुसार, बीजों का आवंटन उपलब्धता और विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी आवश्यकता के अनुसार समय रहते बुकिंग सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें योजना का पूरा लाभ मिल सके।
आधुनिक खेती अपनाने की अपील, आय बढ़ाने पर जोर
उप कृषि निदेशक ने किसानों से अपील की है कि वे उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग करें और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और खेती अधिक लाभकारी बन सकेगी।