साकेत कोर्ट का बड़ा आदेश: AAP को बांसुरी स्वराज से जुड़े कथित मानहानि वीडियो हटाने के निर्देश, सौरभ भारद्वाज को भी कंटेंट डिलीट करना होगा
नई दिल्ली। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं सौरभ भारद्वाज व अंकुश नारंग को बड़ा कानूनी झटका देते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज से जुड़े कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक वीडियो को हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने माना कि इन वीडियो के लगातार प्रसार से उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर और अपूरणीय क्षति हो सकती है।
कोर्ट ने वीडियो हटाने और आगे शेयर करने पर लगाई रोक
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दक्षिण) गुरविंदर पाल सिंह ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट आदेश दिया कि संबंधित वीडियो को तुरंत हटाया जाए और आगे किसी भी प्लेटफॉर्म पर शेयर करने पर रोक रहे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि 48 घंटे के भीतर सामग्री नहीं हटाई जाती है तो बांसुरी स्वराज संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से सीधे संपर्क कर सकती हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 मई 2026 को तय की गई है।
19 अप्रैल के वीडियो से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला 19 अप्रैल को साझा किए गए एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें बांसुरी स्वराज को राहुल गांधी के आवास पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिखाया गया था। इस विरोध मार्च में भाजपा की ओर से कई नेता शामिल थे, जिनमें केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे भी मौजूद थीं। इसी प्रदर्शन के दौरान कुछ नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में भी लिया गया था।
‘जानबूझकर छवि खराब करने का आरोप’
बांसुरी स्वराज ने अदालत में दलील दी कि वीडियो को एडिट कर कैप्शन, ओवरले और कमेंट्री के जरिए इस तरह पेश किया गया कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचे और उनका मजाक उड़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यह कंटेंट बाद में अन्य पक्षों द्वारा भी साझा किया गया, जिससे सोशल मीडिया पर इसका व्यापक प्रसार हुआ।
AAP नेताओं पर गंभीर आरोप
आरोप है कि सौरभ भारद्वाज द्वारा शेयर किए गए वीडियो में एक अपमानजनक शीर्षक के साथ सामग्री प्रस्तुत की गई थी, जिसमें घटनाओं को गलत तरीके से दिखाया गया। वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों से जुड़े दृश्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का भी आरोप लगाया गया है।
‘अपूरणीय नुकसान पहुंचाने’ का दावा
बांसुरी स्वराज ने अदालत को बताया कि इस तरह के वीडियो और उनके प्रसार से उनकी सार्वजनिक छवि को ऐसा नुकसान पहुंचा है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनका कहना है कि यह पूरा अभियान उन्हें बदनाम करने और राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के उद्देश्य से चलाया गया।
पृष्ठभूमि में महिला आरक्षण बिल से जुड़ा प्रदर्शन
यह विवाद उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है जो महिला आरक्षण कानून संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न होने के विरोध में आयोजित किया गया था। इस दौरान भाजपा महिला सांसदों और नेताओं ने दिल्ली में राहुल गांधी के आवास तक मार्च निकाला था, जिसके बाद यह पूरा घटनाक्रम सामने आया।