सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से पाकिस्तान में हड़कंप, UNSC पहुंचा इस्लामाबाद, संधि लागू कराने की लगाई गुहार
न्यूयॉर्क। भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मुद्दे पर घिरे इस्लामाबाद ने अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का रुख किया है और भारत से संधि को पूरी तरह लागू कराने की मांग उठाई है।
UNSC में पाकिस्तान ने उठाया मुद्दा
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गुहार लगाते हुए अनुरोध किया है कि वह इस स्थिति पर संज्ञान ले और भारत को सिंधु जल संधि के तहत अपने सभी दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य करे। पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि भारत द्वारा जल डेटा साझा करने और सहयोग प्रक्रिया को तुरंत बहाल किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने गुरुवार को UNSC अध्यक्ष जमाल फारेस अलरोवाई से मुलाकात की और इस संबंध में विदेश मंत्री इशाक डार का पत्र भी सौंपा।
1960 की ऐतिहासिक संधि पहली बार निलंबित
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। यह समझौता दशकों से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बना रहा, यहां तक कि युद्ध और तनाव के दौर में भी इसे लागू रखा गया। हालांकि, पहली बार भारत ने इस संधि को स्थगित करने का कदम उठाया है।
पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था पर निर्भरता
यह संधि पाकिस्तान के लिए बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि देश की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों पर निर्भर है। इन्हीं नदियों से पाकिस्तान के बड़े हिस्से की सिंचाई व्यवस्था संचालित होती है।
भारत ने क्यों लिया सख्त फैसला
भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन इस हमले के पीछे हैं और आतंकवाद को समर्थन देने के कारण संधि की भावना का उल्लंघन हुआ है।
भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा गया कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ी कूटनीतिक हलचल
सिंधु जल संधि को लेकर अब मामला अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है, जिससे भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। UNSC में पाकिस्तान की अपील को कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, लेकिन भारत पहले ही अपने रुख को सुरक्षा और आतंकवाद के संदर्भ में स्पष्ट कर चुका है।